क्या आत्मा के प्रभाव में गिरना बाइबल आधारित है?



प्रश्न: क्या आत्मा के प्रभाव में गिरना बाइबल आधारित है?

उत्तर:
अधिकत्तर, "आत्मा के प्रभाव में गिरना" तब घटित होता है जब एक सेवक किसी के ऊपर अपने हाथों को रखता है, और वह व्यक्ति धरती पर, पवित्र आत्मा की सामर्थ्य के द्वारा आभासित आत्मा के प्रभाव के कारण गिर जाता है। वे लोग जो आत्मा के प्रभाव में गिरने में विश्‍वास करते हैं, बाइबल के उन संदर्भों को उपयोग करते हैं जो लोगों को "मृतक जैसे होने" (प्रकाशितवाक्य1:17) या "अपने मुँह के बल गिरने" (यहेजकेल 1:28; दानिय्येल 8:17-18, 10:7-9) की बात करते हैं। तथापि, बाइबल आधारित इस मुँह के बल गिरने और आत्मा के प्रभाव में गिरने के अभ्यास के ऊपर की भिन्नताएँ पाई जाती हैं।

1. बाइबल आधारित मुँह के बल एक व्यक्ति का गिरना जो कुछ उसने सामान्य घटनाओं से परे एक दर्शन या घटना में देखा था, उसके प्रति प्रतिक्रिया स्वरूप था, जैसे कि मसीह के रूपान्तरण (मत्ती 17:6) के समय घटित हुआ। आत्मा के प्रभाव में गिरने के गैर-बाइबल आधारित अभ्यास में, एक व्यक्ति दूसरे व्यक्ति के स्पर्श या वक्ता के हाथों की गति के प्रति प्रतिक्रिया व्यक्त करते हैं।

2. इसके बाइबल आधारित कुछ ही उदाहरण हैं या ही बहुत कम मिलते हैं, और वे कुछ लोगों के जीवनों में ही शायद ही कभी घटित हुए हैं। आत्मा के अधीन आने की घटना में, नीचे गिरना बार बार होने वाली घटना और अनुभव है जो कईयों के साथ घटित होता है।

3. बाइबल आधारित उदाहरणों में, लोग अपने मुँह के बल या तो किसी को या जो कुछ उन्होंने देखा उसके कारण गिर जाते थे। आत्मा के प्रभाव में गिरना इसके बिल्कुल ही विपरीत है, यहाँ लोग पीछे की ओर गिरते हैं, या तो वक्ता के हाथों के हिलाए जाने या फिर एक कलीसियाई अगुवे के स्पर्श की प्रतिक्रिया स्वरूप (या फिर कुछ घटनाओं में धक्का दिए जाने के कारण)।

हम यह दावा नहीं कर रहे कि आत्मा के प्रभाव में गिरने के सभी उदाहरण नकली हैं या एक स्पर्श या धक्के के ही कारण होते हैं। बहुत से लोग एक ऊर्जा या एक शक्ति के अनुभव किए जाने का दावा करते हैं जो उनके पीछे की ओर गिरने का कारण थे। तथापि, हम इस धारणा का कोई भी बाइबल आधारित आधार नहीं पाते हैं। हाँ, हो सकता है कि इसमें किसी तरह की कोई ऊर्जा या शक्ति कार्यरत् हो, परन्तु यदि ऐसा है, तो यह परमेश्‍वर नहीं हो सकता है और न ही यह पवित्र आत्मा के कार्य करने का परिणाम हो सकता है।

यह दुर्भाग्य की बात है कि लोग व्यावहारिक फल की खोज करने की अपेक्षा जिसे आत्मा हमारे जीवनों के साथ मसीह की महिमा को देने के उद्देश्य से देता है, इस तरह की विचित्र नकली बातों को ढूंढ़ते हैं जो किसी तरह का कोई आत्मिक फल उत्पन्न नहीं करती हैं (गलातियों 5:22-23)। आत्मा के द्वारा भरे होने इस तरह की नकली बातों के द्वारा प्रमाणित नहीं हो सकता है, परन्तु एक ऐसे जीवन के द्वारा जिससे परमेश्‍वर का वचन इस तरह से बहता है जो कि स्तुति, धन्यवाद और परमेश्‍वर की आज्ञाकारिता के उमण्डने लगता है।



हिन्दी के मुख्य पृष्ठ पर वापस जाइए



क्या आत्मा के प्रभाव में गिरना बाइबल आधारित है?