फसह का मेम्ना क्या है? यीशु हमारे लिए फसह का मेम्ना कैसे है?


प्रश्न: फसह का मेम्ना क्या है? यीशु हमारे लिए फसह का मेम्ना कैसे है?

उत्तर:
फसह का मेम्ना वह पशु था, जिसे परमेश्वर ने इस्राएलियों को मिस्र में एक बलिदान के रूप में, जिस रात परमेश्वर ने प्रत्येक घर के पहिलौठे पुत्रों को मारा था, उस रात उपयोग करने के लिए निर्देश दिया था (निर्गमन 12:29)। यह परमेश्वर की ओर से फिरौन के विरुद्ध आई अन्तिम विपत्ति थी, और इसके कारण फिरौन ने इस्राएलियों को गुलामी से छुटकारा दिया (निर्गमन 11:1)। उस दुर्भाग्य से भरी हुई रात के बाद, परमेश्वर ने इस्राएलियों को एक स्थायी स्मारक के रूप में फसह का पर्व मनाने का निर्देश दिया (निर्गमन 12:14)।

परमेश्वर ने इस्राएल के लोगों के प्रत्येक घर को बिना दोष के एक वर्षीय नर मेम्ने का चुनाव करने का निर्देश दिया (निर्गमन 12:5; की तुलना लैव्यव्यवस्था 22:20-21 से करें)। घर के मुखिया को गोधूलि के समय मेम्ने का वध, इस बात को ध्यान में रखते हुए करना था कि उसकी कोई भी हड्डी नहीं टूटनी चाहिए थी, और उसका कुछ लहू घर की चौखट और ऊपर की अंलंगों की ओर लगा हुआ होना चाहिए था। मेम्ने को भूना और खाया जाना था (निर्गमन 12:7-8)। परमेश्वर ने इस बात का भी विशेष निर्देश दिया था कि कैसे इस्राएलियों को मेम्ने को खाना था, "कमर बाँधे, पाँव में जूती पहिने, और हाथ में लाठी लिए हुए उसे फुर्ती से खाना; वह तो यहोवा का पर्व होगा" (निर्गमन 12:11)। दूसरे शब्दों में, उन्हें यात्रा करने के लिए तैयार रहना था।

परमेश्वर ने कहा था कि जब वह एक घर की चौखट पर मेम्ने के लहू को देखेगा, तो वह उस घर को "नाश" नहीं करेगा और वह "नाश करने वाले" को वहाँ प्रवेश करने की अनुमति नहीं देगा (निर्गमन 12:23)। मेम्ने के लहू के बिना जो भी घर पाया जाएगा उस रात उस घर का पहिलौठा पुत्र मार दिया जाएगा (निर्गमन 12:12-13)।

नया नियम फसह के इस मेम्ने और आने वाले फसह के मेम्ने, अर्थात् यीशु मसीह के बीच पाए जाने वाले सम्बन्ध के पूर्वाभास को स्थापित करता है (1 कुरिन्थियों 5:7)। भविष्यद्वक्ता यूहन्ना बपतिस्मा देने वाले ने यीशु को "परमेश्वर का मेम्ना" के रूप में मान्यता दी (यूहन्ना 1:29), और प्रेरित पतरस मेम्ने को निर्दोष कहते हुए (निर्गमन 12:5) मसीह के साथ जोड़ता है, जिसे वह "निर्दोष और निष्कलंक मेम्ने" कहता है। (1 पतरस 1:19)। यीशु को "बिना दोष के" कहा जाना योग्य है, क्योंकि उसका जीवन पूरी तरह से पाप से मुक्त था (इब्रानियों 4:15)। प्रकाशितवाक्य में, प्रेरित यूहन्ना यीशु को "एक मेम्ने" के रूप में देखता है, जो कि "मानो वध किया गया है" (प्रकाशितवाक्य 5:6)। यीशु को उस समय के समय क्रूस के ऊपर चढ़ाया गया था जब फसह का पर्व मनाया जा रहा था (मरकुस 14:12)।

बाइबल कहती है कि विश्वासियों ने प्रतीक के रूप से मसीह के बलिदानात्मक लहू को अपने मनों पर लागू किया है और इस कारण अनन्त मृत्यु से बच गए हैं (इब्रानियों 9:12, 14)। जिस तरह फसह के मेम्ने के लहू को लागू किए जाने के कारण "विनाश करने वाला" प्रत्येक उस घर को छोड़ देता था, जहाँ उसका लहू लगा हुआ होता था, पापियों के ऊपर मसीह के लगाए गए लहू के कारण परमेश्वर का न्याय उन्हें दोष मुक्त कर देता और विश्वासियों को जीवन प्रदान करता है (रोमियों 6:23)।

जैसे पहले फसह ने इब्रानियों को मिस्र की दासता से छुटकारे के रूप में चिह्नित किया था, वैसे ही मसीह की मृत्यु पाप की गुलामी से हमारे छुटकारे को चिह्नित करती है (रोमियों 8:2)। जैसे पहला फसह वार्षिक पर्व की स्मृति के रूप में आयोजित किया जाना चाहिए था, वैसे ही मसीहियों को प्रभु की मृत्यु का स्मरण प्रभु भोज के द्वारा तब तक करते रहना है, जब तक कि वह वापस नहीं आता (1 कुरिन्थियों 11:26)।

पुराने नियम के फसह का मेम्ना, यद्यपि उस समय उत्तम और अन्तिम फसह के मेम्ने, अर्थात् यीशु मसीह की वास्तविकता मात्र था, तथापि यह उसका एक पूर्वाभास था। अपने पाप रहित जीवन और बलिदानात्मक मृत्यु के द्वारा, यीशु लोगों को मृत्यु से बचाने और अनन्त जीवन की एक निश्चित आशा देने के लिए एकमात्र योग्य व्यक्ति बन गया (1 पतरस 1:20-21)।

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