मोआबीवंशी कौन थे?


प्रश्न: मोआबीवंशी कौन थे?

उत्तर:
मोआबी लोग लूत के पुत्र मोआब से निकले हुए एक गोत्र के लोग थे, जो उसकी सबसे बड़ी पुत्री के साथ अनाचारपूर्ण सम्बन्ध से उत्पन्न हुआ था (उत्पत्ति 19:37)। सोअर से, जो कि उनके गोत्र की जन्मभूमि थी, मृत सागर की दक्षिण-पूर्वी सीमा तक, ये धीरे-धीरे यरदन के पूर्वी क्षेत्र तक फैल गए। मिस्र से पलायन के कुछ समय पहले, योद्धा जैसे एमोरियों ने अपने राजा सीहोन के अधीन यरदन को पार किया और मोआबियों को अर्नोन नदी की घाटी और यब्बोक नदी के मध्य के क्षेत्र से बाहर निकाल दिया और उसे अपने अधीन कर लिया, जिससे हेशबोन उनकी राजधानी बन गई। मोआबी उस समय अर्नोन घाटी के दक्षिण में रहा करते थे (गिनती 21:26-30)।

निर्गमन के समय इस्राएलियों ने मोआब से होकर यात्रा नहीं की, परन्तु वे पूर्व में "जंगल" से होते हुए अन्त में अर्नोन के उत्तर की ओर वाले देश में पहुँचे थे। मोआबी लोग घबरा गए थे, और उनके राजा, बालाक ने मिद्यानियों से सहायता मांगी थी (गिनती 22:2–4)। यही वह अवसर था, जब बिलाम ने बालाक तक की अपनी यात्रा की थी (गिनती 22:2–6)।

मोआब के मैदानों में, जो अमोरियों की अधीनता में था, इस्राएल की सन्तान ने कनान देश में प्रवेश करने से पहले अन्तिम बार अपने तम्बुओं को खड़ा किया था (गिनती 22:1; यहोशू 13:32)। यह पिसगा की चोटी से था कि भविष्यद्वक्ताओं के सबसे अधिक सामर्थी मूसा, ने प्रतिज्ञा की भूमि को देखा था; यह नबो का स्थान था, जहाँ एकान्त में उसकी मृत्यु हुई थी; यह बेतपोर के सामने वाली तराई थी, जहाँ उसे मिट्टी दी गई थी (व्यवस्थाविवरण 34:5–6)।

बेसाल्ट का एक पत्थर, जिसमें राजा मेशा के लिए लिखा हुआ एक शिलालेख मिलता है, 1868 में यरूशलेम के एक जर्मन मिशनरी क्लेन के द्वारा डिबोन में खोजा गया था, जिसमें इब्रानी-फनीके अक्षरों में लिखी गई चौंतीस पँक्तियाँ सम्मिलित थीं। पत्थर को मेशा ने लगभग 900 ईसा पूर्व में अपनी विजय को लिपिबद्ध करने और स्मारक के रूप में स्थापित किया था। यह ओम्री, उसके सार्वजनिक भवनों और होरोनैम के विरूद्ध उसके युद्धों के साथ ही मेशा के युद्धों को भी लिपिबद्ध करता है। यह शिलालेख 2 राजाओं 3:4–27 में वर्णित राजा मेशा के इतिहास को पूरक और उसकी पुष्टि करता है। यह वर्णमाला वाले अक्षरों में लिखा गया सबसे पुराना शिलालेख है, और इब्रानी प्राचीनता के क्षेत्र में इसके बहुमूल्य भाषाई महत्व पाए जाते हैं।

कदाचित् मोआब से आने वाला सबसे महत्वपूर्ण बाइबल चरित्र रूत था, जो "मोआब की स्त्रियों में से थी" परन्तु आनुवंशिक रूप से इस्राएल के साथ लूत, अब्राहम के भतीजे के माध्यम से जुड़ी हुई थी (रूत 1:4; उत्पत्ति 11:31; 19:37)। रूत इस बात के लिए एक उदाहरण है कि परमेश्‍वर एक जीवन को कैसे परिवर्तित कर सकता है और उसे एक ऐसी दिशा में ले जा सकता है, जिसे उसने पूर्व निर्धारित किया है, और हम देखते हैं कि परमेश्‍वर रूत के जीवन में अपनी योजना को कैसे पूर्ण करता है, ठीक वैसे ही जैसे वह अपनी सारी सन्तान के साथ करता है (रोमियों 8:28)। यद्यपि वह मोआब की एक मूर्तिपूजक पृष्ठभूमि से आई थी, एक बार जब वह इस्राएल के परमेश्‍वर से मिलती है, तो रूत विश्‍वास के द्वारा उसके लिए एक जीवित गवाह बन जाती है। मोआबिन रूत, यीशु मसीह की वंशावली में वर्णित कुछ स्त्रियों में से एक है (मत्ती 1:5)।

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