मसीहा का क्या अर्थ है?


प्रश्न: मसीहा का क्या अर्थ है?

उत्तर:
शब्द मसीहा इब्रानी भाषा के शब्द मसीआख़ से आया है और जिसका अर्थ "एक अभिषिक्त जन" या "चुना हुआ" होता है। इसके तुल्य यूनानी भाषा में शब्द क्रिस्टोस या हिन्दी में, मसीह आया है। "यीशु मसीह" नाम "यीशु मसीहा" के तुल्य है। बाइबल के समय में, किसी को तेल से अभिषेक करना इस बात का संकेत था कि परमेश्वर किसी विशेष भूमिका के लिए उस व्यक्ति को अलग कर या पवित्र कर रहा था। इस प्रकार, एक "अभिषिक्‍त व्यक्ति" विशेष रूप से, परमेश्वर-प्रदत्त उद्देश्य वाला व्यक्ति होता था।

पुराने नियम में, भविष्यद्वक्ता, याजक और राजा के पदों के लिए लोगों का अभिषेक किया जाता था। परमेश्वर ने एलिय्याह से कहा कि वह चाहता है कि वह इस्राएल के भविष्यद्वक्ता के रूप में उसका उत्तराधिकारी होने के लिए एलीशा का अभिषेक करें (1 राजा 19:16)। हारून को इस्राएल के पहले महायाजक के रूप में अभिषेक किया गया था (लैव्यव्यवस्था 8:12)। शमूएल ने इस्राएल के राजाओं के रूप में शाऊल और दाऊद दोनों का अभिषेक किया था (1 शमूएल 10:1; 16:13)। इन सभी लोगों ने "अभिषिक्‍त" पदों को धारण किया। परन्तु पुराने नियम ने एक आने वाले उद्धारकर्ता की भविष्यद्वाणी की, जिसे परमेश्वर ने इस्राएल को छुटकारा देने के लिए चुना था (यशायाह 42:1; 61:1–3)। इस उद्धारकर्ता को यहूदियों ने मसीहा कहा।

नासरत का यीशु और भविष्यद्वाणी किया हुआ मसीहा है (लूका 4:17-21; यूहन्ना 4:25-26)। पूरे नए नियम में, हम इस प्रमाण को देखते हैं कि यीशु चुना हुआ जन है: "ये [आश्चर्यकर्म] इसलिये लिखे गए हैं कि तुम विश्‍वास करो कि यीशु ही परमेश्‍वर का पुत्र मसीह है, और विश्‍वास करके उसके नाम से जीवन पाओ" ( यूहन्ना 20:31)। हम यह भी गवाही देते हैं कि यीशु "जीवित परमेश्वर का पुत्र मसीह" है (मत्ती 16:16)। अन्तिम गवाही यह कि यीशु वास्तव में प्रतिज्ञा किया गया मसीहा है, अभिषिक्त जन है, जिसका मृतकों में से पुनरुत्थान हुआ। प्रेरितों के काम 10:39–43 उसके पुनरुत्थान की एक प्रत्यक्षदर्शी गवाह है और यह तथ्य कि "यह वही है जिसे परमेश्‍वर ने जीवतों और मरे हुओं का न्यायी ठहराया है।"

यीशु ने भविष्यद्वक्ता, याजक और राजा की भूमिका को पूरा किया, जो उसके मसीहा होने के अतिरिक्त प्रमाण हैं। वह एक भविष्यद्वक्ता है, क्योंकि उसने परमेश्वर के वचन को स्वयं में प्रस्तुत किया और प्रचार किया (यूहन्ना 1:1-18; 14:24; और लूका 24:19 को देखें); एक याजक है, क्योंकि उसकी मृत्यु हमारे पापों के लिए प्रायश्चित करती है और हमारा मेल-मिलाप पिता से कराती है (इब्रानियों 2:17; 4:14 को देखें); और एक राजा है, क्योंकि उसके पुनरुत्थान के बाद परमेश्वर ने उसे सभी तरह के अधिकार दे दिए (यूहन्ना 18:36; इफिसियों 1:20–23; और प्रकाशितवाक्य 19:16 को देखें)।

यीशु के दिन के यहूदियों को आशा थी कि रोम के शासन को उखाड़ फेंकने और एक सांसारिक राज्य को स्थापित करने के लिए मसीह इस्राएल को छुटकारा देगा (प्रेरितों के काम 1:6 को देखें)। यह यीशु के पुनरुत्थान होने तक सम्भव नहीं हुआ जब उसके शिष्यों ने यह समझाना आरम्भ कर दिया था कि पुराने नियम में वर्णित भविष्यद्वाणियों का वास्तव में क्या अर्थ है कि प्रतिज्ञा किया हुआ मसीहा क्या करेगा (लूका 24:25-27 को देखें)। मसीह को अपने लोगों को आत्मिक रूप से छुटकारा देने; अर्थात् उन्हें पाप से छुड़ाने के लिए सबसे पहले "अभिषिक्त" किया गया था (यूहन्ना 8:31-36)। उसने अपनी मृत्यु और पुनरुत्थान के माध्यम से उद्धार के इस कार्य को पूरा किया (यूहन्ना 12:32; यूहन्ना 3:16)। बाद में, यीशु मसीह अपने लोगों को उनके सांसारिक शत्रुओं से छुड़ाएगा, जब वह पृथ्वी पर अपने राज्य को स्थापित करेगा (यशायाह 9:1-7 को देखें)।

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