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प्रश्न

बाइबल में लाजर कौन था?

उत्तर


बाइबल में लाजर नाम के दो व्यक्ति वर्णित हैं। पहला लाजर यीशु के द्वारा बताई गई कहानी का विषय है (लूका 16:19-31)। लाजर बहुत अधिक गरीब था, कदाचित् बेघर था, और निश्‍चित रूप से एक भिखारी था (लूका 16:20)। वह अक्सर एक धनी व्यक्ति की मेज से गिरने वाली जूठन से अपने पेट को भरने की आशा रखा करता था। दोनों पुरुषों की मृत्यु हुई, और यीशु ने बताया कि कैसे लाजर को "अब्राहम की गोद," जो कि विश्राम और शान्ति का स्थान है, ले जाया गया, जबकि धनी व्यक्ति को "अधोलोक", जो कि सचेत पीड़ा का स्थान है, ले जाया गया था (लूका 16:22–23)। बाइबल के कुछ विद्वानों का मानना है कि यीशु एक दृष्टान्त का उल्लेख कर रहा था, अर्थात् एक काल्पनिक कहानी जिस का शाब्दिक अर्थ नहीं होता है। यद्यपि, यीशु कहानी में वास्तविक नामों का उपयोग करता है, वह कहानी की व्याख्या नहीं करता है, और न ही वह इसके अन्त में एक नैतिक शिक्षा को जोड़ता है। वह कहानी को स्वयं से ही शिक्षा देने के लिए उपयोग करता है। इन विवरणों के कारण, लाजर और धनी व्यक्ति की कहानी एक सच्चा वृतान्त हो सकती है, जो कि हो सकता है कि लाजर के वास्तविक परिस्थितियों और अविश्‍वासी धनी व्यक्ति से सम्बन्धित हो। चाहे कुछ भी क्यों न हो, स्वर्ग और नरक की वास्तविकता पर यीशु की शिक्षा स्पष्ट है। यीशु की कहानी में लाजर बाइबल में कहीं और दिखाई नहीं देता है, और हमें नहीं पता कि वह इतिहास के किस समय में रहा होगा, यदि वह एक वास्तविक व्यक्ति था।

दूसरा लाजर, जिसे बैतनिय्याह का लाजर भी कहा जाता है, मरियम और मार्था का भाई था। ये तीन भाई-बहन यीशु के मित्र और शिष्य थे, और ये वे लोग थे, जिन्हें यीशु से प्रेम था (यूहन्ना 11:5)। एक बार, बैतनिय्याह से यीशु के लिए एक आवश्यक सन्देश आया: कि यीशु का मित्र लाजर बीमार हो गया था, और मरियम और मार्था चाहते थे कि यीशु आकर उसे चँगा कर दे, क्योंकि उसकी मृत्यु निकट थी। यीशु ने तब अपने शिष्यों और मित्रों को उलझन में डाल दिया। उसने यह कहकर आरम्भ किया कि इस बीमारी से उसकी मृत्यु नहीं होगी; अपितु, ऐसा परमेश्‍वर की महिमा के लिए होगा (यूहन्ना 11:4)। तब यीशु दो दिन और रुक गया, जहाँ पर उसने यहूदिया वापस जाने का सुझाव दिया, जहाँ लाजर था, परन्तु साथ ही यह वह स्थान था, जहाँ यीशु के शत्रुओं ने उसे कुछ ही समय पहले पत्थरवाह करने का प्रयास किया था (यूहन्ना 11:5–8)। यीशु के रुकने के कारण, लाजर की मृत्यु हो गई, परन्तु यीशु ने लाजर को "सो" जाने के रूप में सन्दर्भित किया और शिष्यों को बताया कि वह उसे जगाने जा रहा है (यूहन्ना 11:11)। शिष्यों ने उत्तर दिया, "हे प्रभु, यदि वह सो गया है, तो स्वस्थ हो जाएगा," स्पष्ट रूप से वे उसकी शारीरिक नींद के बारे में सोच रहे थे (यूहन्ना 11:12)। तब यीशु ने उन्हें स्पष्ट किया कि लाजर मर गया था, परन्तु वे तौभी उससे मिलने के लिए जा रहे थे (यूहन्ना 11:14)। थोमा पूरी तरह से शिष्यों की उलझन से भरी हुई हताशा को यह कहते हुए व्यक्त करता है कि, "आओ, हम भी उसके साथ मरने को चलें" (यूहन्ना 11:16) - उसने देखा कि यीशु दृढ़ था, परन्तु ऐसी यात्रा के खतरों को जानता था (यूहन्ना 11:8)।

जब वे बैतनिय्याह में लाजर के घर पहुँचे, तो उन्होंने मरियम और मार्था को दु:खी पाया। उन्होंने चार दिन पहले ही अपने भाई को गाड़ दिया था। यीशु सहायता करने नहीं आया था। वे भ्रमित और निराश थे, परन्तु यीशु में उनका विश्‍वास अटल था (यूहन्ना 11:17-36)। जब यीशु ने अप्रत्याशित कार्य को किया तो सब कुछ स्पष्ट हो गया: वह लाजर की कब्र पर गया और उसे मृतकों में से जीवित किया (यूहन्ना 11:43–44)।

जब यीशु ने लाजर की बीमारी के बारे में सुना तब लाजर की बीमारी, मृत्यु और पुनरुत्थान के पूरे प्रकरण ने परमेश्‍वर को महिमा देने और यीशु के अनुयायियों के विश्‍वास को बढ़ाने की दिशा में काम किया। इससे पहले कि वह लाजर को जीवित करता, यीशु ने प्रार्थना की, "हे पिता, मैं तेरा धन्यवाद करता हूँ कि तू ने मेरी सुन ली है। मैं जानता था कि तू सदा मेरी सुनता है, परन्तु जो भीड़ आस पास खड़ी है, उनके कारण मैं ने यह कहा, जिससे कि वे विश्‍वास करें कि तू ने मुझे भेजा है” (यूहन्ना 11:41–42)। यीशु की प्रार्थना का उत्तर दिया गया था: लाजर के प्राण वापस आ गए थे, और "तब जो यहूदी मरियम के पास आए थे और उसका यह काम देखा था, उनमें से बहुतों ने उस पर विश्‍वास किया" (यूहन्ना 11:45)।

जब यीशु ने लाजर को कब्र से बाहर बुलाया, तो लाजर - एक ज़ोम्बी अर्थात् स्वचालित यंत्रतुल्य मरा हुआ व्यक्ति या आधा-मृत या मरा हुआ नहीं, अपितु पूरी तरह से जीवित और चँगे व्यक्ति के रूप में बाहर आया। मसीह की सामर्थ्य ऐसी है। पवित्रशास्त्र कब्र में व्यतीत किए चार दिनों के समय में लाजर के अनुभव के बारे में लिपिबद्ध नहीं करता है। हम विश्‍वास करते हैं कि उसकी आत्मा/प्राण स्वर्गलोक में थी, जहाँ दूसरा लाजर था।

लाजर को मृतकों से जीवित किए जाने के पश्‍चात्, मुख्य याजकों और फरीसियों ने उसे मारने का षड़यन्त्र रचा, क्योंकि बहुत सारे लोग इस आश्‍चर्यकर्म के गवाह थे (यूहन्ना 12:9–11)। मसीह के शत्रु आश्‍चर्यकर्म के होने से इन्कार नहीं कर सकते थे; अगली सबसे अच्छी बात यह है कि, उनके विचार में, प्रमाण को ही नष्ट कर देना चाहिए था – इस घटना में, प्रमाण एक जीवित, श्‍वास लेने वाला व्यक्ति था। परन्तु वे सत्य को फैलने से नहीं रोक सकते थे।

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