क्या यीशु और शैतान आपस में भाई हैं?



प्रश्न: क्या यीशु और शैतान आपस में भाई हैं?

उत्तर:
नहीं, यीशु और शैतान आपस में एक दूसरे के भाई नहीं हैं। यीशु परमेश्‍वर है और शैतान उसकी रचनाओं में से एक है। न केवल यीशु और शैतान आपस में एक दूसरे के भाई हैं, अपितु वे उतने ही एक दूसरे पृथक हैं, जितना की रात दिन से पृथक है। यीशु परमेश्‍वर का देहधारी — शाश्‍वतकालीन, सर्वज्ञानी और सर्वसामर्थी है, जबकि शैतान स्वर्ग से नीचे गिराया हुआ स्वर्गदूत है, जो परमेश्‍वर के उद्देश्यों को पूरा करने के लिए परमेश्‍वर के द्वारा रचा गया था। यह शिक्षा कि यीशु और शैतान आपस में एक दूसरे के "आत्मिक भाई" हैं, मॉरमनवाद (लेटर डे सेन्ट्स) की कई झूठी शिक्षाओं में से एक है और कुछ सीमा तक यहोवा विटनेसेस् अर्थात् यहोवा के साक्षियों की भी है। इन दोनों समूहों को उचित रूप से झूठी शिक्षा देने वाली कलीसियाओं के रूप में चिह्नित किया गया है, क्योंकि वे आवश्यक मसीही विश्‍वास के धर्मसिद्धान्तों को अस्वीकृत करते हैं। यद्यपि, वे मसीही विश्‍वास के शब्दों को जैसे कि यीशु, परमेश्‍वर और उद्धार का उपयोग करते हैं, तथापि, उनके पास सबसे मूल और आवश्यक मसीही सिद्धान्तों के ऊपर झूठी शिक्षाओं आधारित विचार और दृष्टिकोण हैं। (कृपया ध्यान दें कि अधिकांश मॉरमन आज दृढ़ता के साथ इन्कार करते हैं कि वे यह विश्‍वास करते हैं कि यीशु और शैतान आपस में एक दूसरे के भाई हैं। यद्यपि, यह शिक्षा निश्चित रूप से आरम्भिक मॉरमनवादियों का विश्‍वास रह चुकी है)।

यह शिक्षा कि यीशु और शैतान एक दूसरे के "आत्मिक भाई" हैं, मॉरमनवादियों के द्वारा पवित्रशास्त्र की गलत समझ और पवित्रशास्त्र को विकृत किए जाने के साथ ही उनके द्वारा बाइबल-से-अतिरिक्त कुछ शिक्षाओं को आधिकारिक मानने के द्वारा आई है। सीधे शब्दों में कहना कि आप बाइबल की व्याख्या को शुद्ध व्याख्याशास्त्र आधारित सिद्धान्तों का उपयोग करके नहीं कर सकते हैं और इस विचार तक नहीं पहुँच सकते हैं कि यीशु और शैतान एक दूसरे के "आत्मिक भाई" हैं। पवित्रशास्त्र स्पष्ट है कि यीशु पूरी तरह से ईश्‍वर है, वह किसी भी रीति से परमेश्‍वर से कुछ भी कम नहीं है, जैसे कि मॉरमन या अन्य सम्प्रदाय मानते हैं। साथ ही पवित्रशास्त्र स्पष्ट है कि ईश्‍वर अपनी सृष्टि के ऊपर श्रेष्ठ है, जिसका अर्थ है कि सृष्टिकर्ता मसीह और शैतान की सृष्टि के मध्य में किसी तरह की कोई तुलना हो ही नहीं सकती है।

मॉरमनवादियों की मान्यता है कि यीशु मसीह स्वर्गीय पिता की ओर से उसकी कई पत्नियों में से एक के द्वारा उत्पन्न की गई पहली "आत्मिक सन्तान" थी। यीशु को एक सच्चे परमेश्‍वर के रूप में स्वीकार करने की अपेक्षा, वे यह विश्‍वास करते हैं कि वह परमेश्‍वर बन गया था, उसी की तरह वे भी एक दिन परमेश्‍वर बन जाएँगे। मॉरमन के धर्मसिद्धान्त के अनुसार, परमेश्‍वर के "आत्मिक बच्चों" के रूप में, यीशु, शैतान या लूसिफर से पूर्व-अस्तित्व में था, जो कि "परमेश्‍वर का दूसरा पुत्र" और यीशु का "आत्मिक भाई" था। यह विडम्बना है कि वे अपने कुलुस्सियों 1:15 को इसका प्रमाण देने के लिए "मूल पाठ" के रूप में उपयोग करते हैं, क्योंकि इसमें ऐसे कहा गया है: "वह तो अदृश्य परमेश्‍वर का प्रतिरूप और सारी सृष्टि में पहिलौठा है।" तथापि वे वचन 16 को अनदेखा कर देते हैं, जहाँ पर हम देखते हैं कि "क्योंकि उसी (मसीह) में सारी वस्तुओं की सृष्टि हुई, स्वर्ग की हों अथवा पृथ्वी की, देखी या अनदेखी, क्या सिंहासन, क्या प्रभुताएँ, क्या प्रधानताएँ, क्या अधिकार, सारी वस्तुएँ उसी के द्वारा और उसी के लिए सृजी गई हैं।" सारी वस्तुएँ — सिंहासन, प्रभुताएँ, अधिकार या सामर्थ्य — जिसमें शैतान और उसकी दुष्टात्माएँ भी सम्मिलित हैं।

यह विश्‍वास करने के लिए कि शैतान और यीशु "आत्मिक भाई" हैं, एक व्यक्ति को पवित्रशास्त्र की स्पष्ट शिक्षा से इनकार करना होगा। पवित्रशास्त्र पूर्ण रीति से स्पष्ट है कि यह यीशु मसीह ही था, जिसने सभी वस्तुओं को रचा था और यह कि वह त्रिएक परमेश्‍वरत्व के दूसरे व्यक्ति के रूप में पूरी तरह से पूर्ण और विशेष परमेश्‍वर है। यीशु ने पवित्रशास्त्र के कई अंशों में स्वयं को परमेश्‍वर होने का दावा किया है। यूहन्ना 10:30 में यीशु ऐसे कहता है कि, "मैं और पिता एक हैं।" यीशु परमेश्‍वर से कम होने का दावा नहीं कर रहा था। वह घोषणा कर रहा था कि वह पूरी तरह से परमेश्‍वर था। यूहन्ना 1:1-5 में यह स्पष्ट है कि यीशु सृजा हुआ नहीं था और उसने स्वयं सभी वस्तुओं को रचा था। "सब कुछ उसी के द्वारा उत्पन्न हुआ और जो कुछ उत्पन्न हुआ है, उसमें से कोई भी वस्तु उसके बिना उत्पन्न नहीं हुई" (यूहन्ना 1:3)। इससे अधिक स्पष्ट और क्या हो सकता है? "सभी वस्तुओं" का अर्थ जो यह कह रहा है, वह शैतान को भी इसमें सम्मिलित करता है, जो एक स्वर्गदूत के रूप में उसके द्वारा ही अन्य स्वर्गदूतों और दुष्टात्माओं की तरह ही रचा गया था। पवित्रशास्त्र शैतान को स्वर्ग से नीचे गिराए हुए एक दूत के रूप में वर्णित करता है, जिसने परमेश्‍वर और यीशु के परमेश्‍वर होने के विरूद्ध विद्रोह किया था। शैतान और यीशु के मध्य एकमात्र एक ही सम्बन्ध है, और वह सृष्टि और सृष्टिकर्ता का है, यीशु मसीह के धर्मी न्यायी होने और सृजे हुए पापी शैतान के मध्य का सम्बन्ध है।

मॉरमनवादियों की तरह ही यहोवा के साक्षी भी यही शिक्षा देते हैं कि यीशु और शैतान आपस में एक दूसरे के आत्मिक भाई हैं। यद्यपि, कुछ मॉरमनवादी और यहोवा के साक्षी कभी-कभी इस शिक्षा को दूर रहने का प्रयास करते हैं, क्योंकि यह जो कुछ बाइबल कहती है, उसके पूर्ण रीति से विरोध में है, यह तथापि वही शिक्षा है, जिसमें ये संगठन विश्‍वास करते हैं और यही उनके आधिकारिक धर्मसिद्धान्त का अंश भी है।

मॉरमनवादी विश्‍वास करते हैं कि न केवल यीशु और लूसिफर "एलोहीम के आत्मिक बच्चे" थे, परन्तु यह भी कि मनुष्य भी आत्मिक बच्चों के रूप में ही हैं। दूसरे शब्दों में उनका यह विश्‍वास है कि "परमेश्‍वर, स्वर्गदूत, और मनुष्य एक ही प्रजाति हैं, एक ही वंश, एक ही बड़ा परिवार है।" यही कारण है कि उनकी मान्यता है कि वे स्वयं एक दिन उतने ही परमेश्‍वर बन जाएँगे, जितना की यीशु है, और यहाँ तक कि पिता परमेश्‍वर बन जाएँगे। परमेश्‍वर और उनकी सृष्टि के मध्य पवित्रशास्त्र में स्पष्ट भिन्नता को देखने के अपेक्षा, वे यह विश्‍वास करते हैं कि एक दिन वे स्वयं परमेश्‍वर बन जाएँगे। इसमें कोई सन्देह नहीं है कि यह वही पुराना झूठ है, जिसे शैतान हमें अदन की वाटिका के दिनों से कहता चला आ रहा है (उत्पत्ति 3:15)। स्पष्ट है कि परमेश्‍वर के सिंहासन को हड़पने की इच्छा लोगों के मनों के केन्द्रीय स्थान में है।

मत्ती 16:15 में यीशु एक महत्वपूर्ण प्रश्‍न को पूछता है: "तुम मुझे क्या कहते हो कि मैं कौन हूँ?" यह एक ऐसा प्रश्‍न है जो मोक्ष के लिए आवश्यक है और एक ऐसा प्रश्‍न है, जिसके उत्तर में मॉरमनवादी और यहोवा के साक्षी गलत हैं। उनका उत्तर यह है कि यीशु शैतान का आत्मिक भाई है, वह गलत हैं। यीशु परमेश्‍वर का पुत्र है, और उसमें ईश्‍वरत्व की परिपूर्णता सदेह वास करती है (कुलुस्सियों 2:9)। उसने शैतान की सृष्टि की है और एक दिन वह शैतान को आग के कुण्ड में डाल देगा, क्योंकि वह परमेश्‍वर के विरूद्ध विद्रोह के लिए केवल दण्ड का ही पात्र है। दु:ख की बात यह है कि जिन्होंने शैतान के झूठ का अनुसरण किया है, उन्हें न्याय के दिन शैतान और उसकी दुष्टात्माओं सहित आग की झील में डाल दिया जाएगा। मॉरमन और यहोवा के साक्षी के ईश्‍वर, वह परमेश्‍वर नहीं हैं, जिसने स्वयं को पवित्रशास्त्र में प्रकट किया है। जब तक वे पश्चाताप नहीं करते हैं और एक सच्चे परमेश्‍वर को नहीं पहचानते और उसकी आराधना नहीं करते हैं, उनके लिए मुक्ति की कोई आशा नहीं है।

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