यीशु किस जाति का था?


प्रश्न: यीशु किस जाति का था?

उत्तर:
यद्यपि बाइबल में एक मनुष्य के रूप में यीशु मसीह के शारीरिक स्वरूप का वर्णन नहीं किया गया है, हम जानते हैं कि उसका जन्म बैतलहम में हुआ था और उसका पालन-पोषण उत्तरी इस्राएल में पाए जाने वाले गलील के शहर नासरत में हुआ था (मत्ती 2:1; लूका 2:4–7; 4:16; यूहन्ना 7:42)। इस प्रकार, यीशु मसीह एक मध्य पूर्वी, इब्री यहूदी व्यक्ति था।

मसीह की वंशावली की जाँच करने से, हमें यह भी पता चलता है कि यीशु एक बहु-जातीय यहूदी था। उसकी वंश परम्परा में विभिन्न जातियों और सांस्कृतिक रेखाओं के गुण पाए जाते थे, जिनमें रूत के माध्यम से मोआबी और रहाब के माध्यम से कनानी सम्मिलित हैं।

यीशु के आरम्भिक चित्रों में उसे एक गहरे रंग वाले काले स्वरूप से चित्रित किया गया है। परन्तु मध्य युग के आरम्भ में, कलाकारों ने उसे यूरोपीय गुणों जैसे हल्की त्वचा, दाढ़ी और लम्बे, हल्के भूरे बालों के साथ चित्रित करना आरम्भ कर दिया था। तौभी, एक मध्य पूर्वी के रूप में, यीशु निश्चित रूप से काले बालों वाली त्वचा को लिए हुए और यहूदी गुणों और जैतूनी रंग वाली त्वचा वाला व्यक्ति रहा था। और, एक बढ़ई के पुत्र के रूप में, वह कदाचित् ही सूर्य की धूप के कारण भूरे रंग वाली त्वचा वाला रहा होगा।

पूरे इतिहास में और प्रत्येक संस्कृति में, लोगों ने यीशु को अपनी जाति के किसी एक व्यक्ति के रूप में चित्रित करने का प्रयास किया है। कदाचित् यही एक कारण रहा होगा कि परमेश्वर ने यीशु की त्वचा के रंग के बारे में अपने वचन में चुप रहने का विकल्प चुना। बाइबल सिखाती है कि परमेश्‍वर ने संसार की विभिन्न नस्लों को बनाया और उनमें से प्रत्येक को अद्वितीय बनाया (प्रेरितों के काम 17:26–27)। हमारा प्रभु, यीशु मसीह, प्रत्येक जाति के लोगों के साथ अपनी पहचान बनाने आया था (मत्ती 28:19)। पिता परमेश्वर सभी लोगों से प्रेम करता है और उसने संसार को बचाने के लिए अपने पुत्र को भेजा (यूहन्ना 3:16-17; प्रकाशितवाक्य 5:9)।

मसीह की नस्लीय जातीयता की पहचान करने से अधिक महत्वपूर्ण उसके मिशन को समझना है — जिसमें मानव जाति को हिस्सा बनना सम्मिलित था (यूहन्ना 1:14; फिलिप्पियों 2:6–7)। एक ऐसे संसार में जहाँ जाति अक्सर लोगों को विभाजित करती है, यीशु मसीह लोगों को विश्वास और प्रेम में एक करने के लिए आया था (यूहन्ना 13:34; कुलुस्सियों 1:4)। परमेश्वर चाहता है कि हम अपने मतभेदों में एक दूसरे को स्वीकार करें (गलातियों 5:22)।

जाति और राष्ट्रीय विरासत उस पृष्ठभूमि में फीकी पड़ जाएंगे, जब मसीह के देह के सदस्य स्वर्ग में साझी नागरिकता के साथ परमेश्वर की सन्तान के रूप में अपनी समृद्ध पहचान को धारण करेंगे (फिलिप्पियों 3:20)। तब हम प्रेरित पौलुस के साथ सहमत हो सकते हैं, जिसने कहा है कि, "अब न कोई यहूदी रहा और न यूनानी, न कोई दास न स्वतन्त्र, न कोई नर न नारी, क्योंकि तुम सब मसीह यीशु में एक हो" (गलातियों 3:28; इफिसियों 2 को भी देखें)।

कदाचित् "यीशु किस जाति का था?" की तुलना में उत्तम प्रश्न यह है कि "यीशु किस जाति के लिए था?" इसका उत्तर यह है कि वह — पूरी मानव जाति के लिए है।

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