क्या यीशु मसीह विवाहित था?



प्रश्न: क्या यीशु मसीह विवाहित था?

उत्तर:
निश्चित रूप से यीशु मसीह विवाहित नहीं था। आज के समय में कुछ लोकप्रिय मिथक हैं जो यह कहते हैं कि मसीह मरियम मगदलीनी के साथ विवाहित था। यह मिथक पूर्णूरूपेण झूठा है और इसका कोई धर्मवैज्ञानिक, ऐतिहासिक या बाइबल आधारित आधार नहीं है। जबकि कुछ गूढ़ज्ञानवादी सुसमाचार उल्लेख करते हैं कि यीशु के मरियम मगदलीनी के साथ बड़ी घनिष्ठता का सम्बन्ध था, इनमें से कोई भी विशेष रूप से यह नहीं कहता कि यीशु ने मरियम मगदलीनी के साथ विवाह किया था, या उसके साथ उसका किसी तरह का कोई प्रेम सम्बन्ध था। इनमें सबसे निकटता से कहने वाला ऐसे कहता है कि यीशु ने मरियम मगदलीनी का "चुम्बन" लिया था, जिसे बड़ी आसानी से "मित्रता भरा हुआ चुम्बन" भी कहा जा सकता है। इसके अतिरिक्त, चाहे गूढ़ज्ञानवादी सुसमाचार प्रत्यक्ष रूप से ही क्यों न कह दें कि यीशु ने मरियम मगदलीनी के साथ विवाह किया था, तौभी उनके पास किसी तरह का कोई प्रामाणिक अधिकार नहीं है, क्योंकि गूढ़ज्ञानवादी सुसमाचारों को यीशु के प्रति गूढ़ज्ञानवादी दृष्टिकोण रखने वालों के द्वारा अविष्कृत होने के कारण धोखाघड़ी के रूप में प्रमाणित किया जा चुका है।

यदि यीशु ने विवाह किया था, तो बाइबल हमें ऐसा होने के बारे में बता दिया होता, या फिर इस सच्चाई के प्रति कुछ अस्पष्ट कथन मिल जाते। पवित्रशास्त्र इस महत्वपूर्ण विषय को लेकर पूर्ण रीति से शान्त न रहता। बाइबल यीशु की माता, गोद लेने वाले पिता, सौतेले-भाइयों और सौतेली बहिनों का उल्लेख करती है। यह क्यों इस सच्चाई को उल्लेख करने से अनदेखा कर देगी कि यीशु की एक पत्नी थी? वे लोग जो यह विश्‍वास/शिक्षा देते हैं कि यीशु विवाहित था, ऐसा उसे "मानवीकरण" करने, उसे और अधिक साधारण, किसी भी व्यक्ति जैसा और अधिक बनाने के लिए करते हैं। लोग सरलता से विश्‍वास करना ही नहीं चाहते हैं कि यीशु शरीर में परमेश्‍वर था (यूहन्ना 1:1, 14; 10:30) । इसलिए, वे यीशु के विवाहित होने, उसके बच्चे होने, और उसके एक साधारण मानवीय प्राणी होने, को अविष्कृत करते और इसके ऊपर विश्‍वास करते हैं।

एक द्वितीय श्रेणी का प्रश्‍न यह होना, "कि क्या यीशु विवाहित हो सकता था।" विवाहित होने में कुछ भी पाप नहीं है। विवाह में यौनिक सम्बन्धों का होना पाप नहीं है। इसलिये, हाँ, यीशु विवाहित हो सकता था और फिर भी वह परमेश्‍वर का पापरहित मेम्ना और संसार का उद्धारकर्ता हो सकता था। ठीक इसी समय, यीशु के विवाह किए जाने के लिए, बाइबल आधारित कोई भी कारण नहीं पाया जाता है। इस विवाद में यह सोच की बात नहीं है। वे लोग जो विश्‍वास करते हैं कि यीशु विवाहित था, यह विश्‍वास नहीं करते हैं कि वह पापरहित था या वह मसीह था। विवाह करना और बच्चों का होना वह उद्देश्य नहीं था जिसके लिए परमेश्‍वर ने उसे भेजा था। मरकुस 10:45 हमें बताता है कि क्यों यीशु इस संसार में आया था, "क्योंकि मनुष्य का पुत्र इसलिये नहीं आया कि उसकी सेवा की टहल की जाए, पर इसलिये आया कि आप सेवा टहल करे, और बहुतों की छुड़ौती के लिये अपना प्राण दे।"



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