क्या यीशु के बाल लम्बे थे?


प्रश्न: क्या यीशु के बाल लम्बे थे?

उत्तर:
यीशु के कई कलात्मक चित्र नीली आँखों और लम्बे, हल्के-भूरे बालों के साथ कोकेशियान अर्थात् सफ़ेद नस्ल वाले पुरूष के रूप में पाए जाते हैं। यह समझना महत्वपूर्ण है कि इस तरह का सामान्य रूप में प्रचलित चित्रण सम्भवतः वैसा नहीं है, जैसा यीशु दिखाई देता था। यीशु नैतिक रूप से यहूदी था, इसलिए उसके पास गहरी भूरी त्वचा, भूरी आँखें और गहरे भूरे या काले बाल चाहिए थे। यीशु विशेष रूप से एक मध्य पूर्वी व्यक्ति की तरह दिखता होगा। बाइबल कहीं पर भी यीशु के शारीरिक विवरण को नहीं देती है, इसलिए किसी को भी उसके दिखावे के बारे में धर्मसैद्धान्तिक नहीं होना चाहिए। और, अन्त में, इस बात की पहचान कि वह किस के जैसा दिखता था, कोई अर्थ नहीं रखता है। यदि यह अर्थ रखता, तो बाइबल में इसके लिए शारीरिक वर्णन दिया गया होता।

यदि उसकी त्वचा का रंग, आँखें, और कलात्मक चित्रण में पाए जाने वाला बालों की सम्भावना गलत है, तो उसके बालों की लम्बाई के बारे में क्या कहा जाए? क्या यीशु के बालों का लम्बे होना भी गलत रूप में चित्रण किया जा रहा है? एक बार फिर से, यहाँ धर्मसैद्धान्तिक होना असम्भव है, क्योंकि बाइबल उसके बालों की लम्बाई के बारे में कुछ भी नहीं कहती है। परन्तु, यदि पहली शताब्दी में यीशु विशेष रूप से एक मध्य पूर्वी पुरुष की तरह दिखता था, तो कलात्मक चित्रण में पाए जाने वाली उसकी बालों की लम्बाई भी गलत है। यीशु के कई कलात्मक चित्र उसे बालों के साथ दिखाते हैं, जो कुछ सीमा तक एक स्त्री के होने जैसे प्रतीत होते हैं। जबकि यहूदियों की इसके प्रति कोई विशेष व्यवस्था नहीं थी, यहूदी पुरुष परम्परागत रूप से यहूदी स्त्रियों की तुलना में बहुत कम बाल रखते थे।

1 कुरिन्थियों 11:14 में पौलुस की टिप्पणी भी पाई जाती है कि, "क्या स्वाभाविक रीति से भी तुम नहीं जानते कि यदि पुरुष लम्बे बाल रखे, तो उसके लिये अपमान है?" यीशु के बालों की लम्बाई एक व्यक्ति के लिए संस्कृति के अनुसार उपयुक्त रही होगी। यीशु के बाल पुरूषों जैसे दिखाई दिए होंगे। अब, इसका जो भी निश्चित अर्थ है, वह विवाद का विषय है। क्या उसके बाल कन्धों तक लम्बे आते थे? सम्भवतः हो सकता है। क्या यीशु के बाल बहुत ही छोटे थे या बहुत ही कम थे? कदाचित् नही। कुँजी यह है कि यह पुरूषों के जैसे दिखाई देने वाले थे। और यही 1 कुरिन्थियों 11:3–15 में पौलुस का संकेत प्रतीत होता है। एक व्यक्ति के बालों को पुरूषों जैसा दिखना चाहिए था। एक स्त्री के बालों को स्त्रियों जैसा दिखना चाहिए था। इसका अर्थ यह एक संस्कृति की तुलना में दूसरी संस्कृति से भिन्न हो सकता है, परन्तु सिद्धान्त संस्कृति के सरोकार के बिना भी बना रहता है।

इस तरह, क्या यीशु के बाल लम्बे थे? इसका उत्तर इस बात पर निर्भर करता है कि "लम्बे" से क्या अर्थ होता है? क्या यह आज के पुरुषों के बालों की लम्बाई से अधिक लम्बा होना हो सकता है? हाँ, हो सकता है। क्या यह इतना लम्बा रहा होगा कि यह स्त्री जैसा दिखाई पड़े? नहीं, परन्तु, जैसे उसकी त्वचा, आँखें और बालों के रंगों के साथ है, उसके बालों की लम्बाई अन्त में कोई अर्थ नहीं रखती है। यह उसके लिए पूरी तरह से अप्रासंगिक है, जो संसार का उद्धारकर्ता है (यूहन्ना 1:29) और स्वर्ग का एकमात्र मार्ग है (यूहन्ना 14:6)।

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