यीशु को कब पता चला कि वह ईश्‍वर था?


प्रश्न: यीशु को कब पता चला कि वह ईश्‍वर था?

उत्तर:
यीशु सदैव से ही परमेश्‍वर था। शाश्‍वतकालीन से ही वह त्रिएकत्व का दूसरा व्यक्ति रहा है, और वह सदैव रहेगा। यह प्रश्‍न कि कब, देहधारण के पश्‍चात् मानवीय यीशु यह जानता था कि वह परमेश्‍वर था, बड़ा ही रूचिपूर्ण है, परन्तु इसे पवित्र शास्त्र में सम्बोधित नहीं किया गया है। हम जानते हैं कि एक वयस्क के रूप में, यीशु को पूरी तरह से पता था कि वह कौन था, जिसे उसने इस तरह से व्यक्त किया है: "मैं तुम से सच सच कहता हूँ, कि पहले इसके कि अब्राहम उत्पन्न हुआ, मैं हूँ।" (यूहन्ना 8:58)। और उसने जब यह प्रार्थना की, "अब हे पिता, तू अपने साथ मेरी महिमा उस महिमा से कर जो जगत की सृष्‍टि से पहले, मेरी तेरे साथ थी" (यूहन्ना 17:5)।

ऐसा प्रतीत होता है कि, एक बच्चे के रूप में, यीशु पहले से ही अपने स्वभाव और कार्य से अवगत था। जब यीशु बारह वर्ष का था, तब यूसुफ और मरियम का परिवार उसे यरूशलेम ले गया। वापसी की यात्रा में वे इस लिए चिन्तित थे कि यीशु उनके साथ यात्रा में नहीं था। वे यरूशलेम लौट आए और यीशु को "उसे मन्दिर में उपदेशकों के बीच में बैठे, उनकी सुनते और उनसे प्रश्‍न करते हुए पाया" (लूका 2:46)। जब उसकी माँ ने यीशु से पूछा कि वह क्यों उनके साथ वापस नहीं आया था और वे उसके लिए चिन्तित थे। यीशु ने इसके प्रतिउत्तर में यह पूछा, "तुम मुझे क्यों ढूँढ़ते थे?... क्या नहीं जानते थे कि मुझे अपने पिता के भवन में होना अवश्य है?" (वचन 49)। यूसुफ और मरियम यीशु के शब्दों को नहीं समझ पाए (वचन 50)। उसके आस-पास के लोगों को भी कुछ समझ में नहीं आया, ऐसा प्रतीत होता है कि यीशु, बहुत ही छोटी आयु में जानते थे कि वह ईश्‍वर के पुत्र थे और पिता ने उसके लिए निर्धारित कार्य को पूरा करने के लिए उसे पूर्वनिर्धारित किया हुआ था।

मन्दिर की घटना के पश्‍चात्, लूका कहता है कि, "यीशु बुद्धि और डील-डौल में, और परमेश्‍वर और मनुष्यों के अनुग्रह में बढ़ता गया" (लूका 2:52)। यदि यीशु के जीवन के इस पड़ाव पर अपने मानवीय अनुभव में वह सब कुछ जानता था, तो उसे "बुद्धि में बढ़ने" की आवश्यकता नहीं पड़ेगी। हम जोर देते हैं कि यह यीशु का मानवीय अनुभव था। यीशु ने कभी भी परमेश्‍वर होना नहीं छोड़ा था, परन्तु कुछ घटनाओं में उसने अपने ईश्‍वरत्व को पिता की इच्छा के अनुसार छिपा दिया था। इस प्रकार, पुत्र ने स्वयं को शारीरिक, बौद्धिक, सामाजिक और आत्मिक विकास के अधीन किया। परमेश्‍वर के पुत्र को स्वेच्छा से एक व्यक्ति के रूप में बुद्धि को आत्मसात करने की आवश्यकता में दे दिया।

यीशु को कब पता चला कि वह ईश्‍वर था? स्वर्गीय दृष्टिकोण से देखा जाए तो पुत्र शाश्‍वतकालीन से ही जानता था कि वह कौन था और उसका सांसारिक काम क्या था। सांसारिक दृष्टिकोण से देखा जाए तो देहधारी यीशु अपने जीवन के आरम्भ में ही समय के किसी पड़ाव पर इस अनुभव को प्राप्त करता है। यह पड़ाव कब आया, हम निश्‍चित रूप से नहीं जान सकते हैं।

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यीशु को कब पता चला कि वह ईश्‍वर था?