यीशु अन्य धार्मिक अगुवों से कैसे भिन्न है?


प्रश्न: यीशु अन्य धार्मिक अगुवों से कैसे भिन्न है?

उत्तर:
एक अर्थ में, यह प्रश्‍न पूछना ऐसा है कि हमारे सौर मण्डल में सूर्य कैसे अन्य तारों से भिन्न है — मुख्य बात तो यह है कि हमारे सौर मण्डल में अन्य सूर्य हैं ही नहीं!

मुख्य बात यह है कि किसी भी अन्य "धार्मिक अगुवे" की तुलना यीशु मसीह के साथ नहीं की जा सकती है। प्रत्येक दूसरा धार्मिक अगुवा या तो जीवित है या फिर मृत। यीशु मसीह ही एकमात्र ऐसा व्यक्ति है, जो मरा (वह हमारे पापों के स्थान पर मरा, वह हमारे पापों के लिए मरा, जैसा कि 1 कुरिन्थियों 15:1-8 में लिखा है) और अब जीवित है। वास्तव में प्रकाशितवाक्य 1:17-18 यह घोषित करता है कि वह सदैव के लिए जीवित है! कोई भी अन्य धार्मिक अगुवा ऐसा दावा भी नहीं कर सकता है, ऐसा दावा जो या तो सत्य है या फिर पूरी तरह से विसंगतिपूर्ण है।

मसीही विश्‍वास के स्वभाव में एक और महत्वपूर्ण भिन्नता पाई जाती है। मसीही विश्‍वास का सार मसीह है। जो क्रूस पर चढ़ाया गया, जिसका पुनरुत्थान हुआ, जो स्वर्ग में चढ़ गया, और जो किसी दिन वापस लौट के आने वाला है। उसके बिना — और उसके पुनरुत्थान के बिना — मसीही विश्‍वास हो ही नहीं सकता है। अन्य मुख्य धर्मों के साथ इसकी तुलना करें। उदाहरण के लिए, हिन्दू धर्म, "महान स्वामियों" में से एक के बिना भी जिसने इसकी स्थापना की है, या तो खड़ा रह सकता है या फिर पूरी तरह से नष्ट हो सकता है। बौद्ध धर्म भी ऐसा ही है। यहाँ तक कि इस्लाम भी मोहम्मद की कहानियों और शिक्षाओं पर ही आधारित है, इस दावे पर नहीं कि वह मृतकों में से पुन: जीवित हो गया था।

प्रेरित पौलुस 1 कुरिन्थियों 15:13-19 में कहता है कि यदि मसीह नहीं जी उठा, तो हमारा विश्‍वास व्यर्थ है और हम अब तक अपने पापों में फँसे हैं! मसीही विश्‍वास के सच्चे दावे केवल पुनरुत्थित हुए यीशु मसीह के ऊपर ही सरलता से और पूरी तरह से आधारित हैं! यदि यीशु वास्तव में, समय और स्थान — में रहते हुए मृतकों में से वापस नहीं लौटा है — तो मसीही विश्‍वास में कोई सच्चाई नहीं है। नए नियम के समय में प्रेरितों और प्रचारकों ने सुसमाचार की सच्चाई की नींव को पुनरुत्थान पर ही रखा।

एक अन्य महत्वपूर्ण बात यह है कि यीशु मसीह ने "परमेश्‍वर का पुत्र" (इब्रानीवाद के अर्थ में "जिसे परमेश्‍वर के द्वारा विशेष ठहराया गया है") होने के साथ-साथ "मनुष्य का पुत्र "(इब्रानीवाद के अर्थ में "जिसे मनुष्य के द्वारा विशेष ठहराया गया है") होने का भी दावा किया है। कई सन्दर्भों में, वह पिता के तुल्य होने का दावा करता है (उदाहरण के लिए, यूहन्ना 10:29-33)। उसे ही ईश्‍वर में पाए जाने वाले सभी विशेषाधिकार और गुणों का श्रेय दिया गया है। तौभी वह एक व्यक्ति था, जिसने कुँवारी से जन्म लिया था (मत्ती 1:18-25; लूका 1:26-56)। एक पापरहित जीवन को यापन करने के पश्‍चात्, उसे सभी लोगों के पापों के दण्ड को अदा करने के लिए क्रूस पर चढ़ा दिया गया: "और वही हमारे पापों का प्रायश्‍चित है, और केवल हमारे ही नहीं वरन् सारे जगत के पापों का भी" (1 यूहन्ना 2:2), और फिर वह तीन दिनों के पश्‍चात् मृतकों में से जीवित हो गया था। वह पूरी तरह से परमेश्‍वर और पूरी तरह से मनुष्य है, "थिऐन्थ्रोपोस" [यूनानी से लिया हुआ शब्द "परमेश्‍वर" (थीओस) और "मनुष्य" (आन्थ्रोपोस)]; तौभी वह एक व्यक्ति है।

मसीह का व्यक्तित्व और कार्य एक न टाले जाने वाले प्रश्‍न को सामने लाता है: आप यीशु के साथ क्या करेंगे? हम उसे निरस्त नहीं कर सकते हैं। हम उसे अनदेखा नहीं कर सकते हैं। वह मानवीय इतिहास में केन्द्रीय व्यक्ति है, और यदि वह पूरे संसार के पापों के लिए मर गया, तो वह आपके लिए भी मरा है। प्रेरित पतरस ने प्रेरितों के काम 4:12 में ऐसे लिखा है कि, "किसी दूसरे के द्वारा उद्धार नहीं; क्योंकि स्वर्ग के नीचे मनुष्यों में और कोई दूसरा नाम नहीं दिया गया, जिसके द्वारा हम उद्धार पा सकें।"

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