इम्मानुएल का क्या अर्थ है?


प्रश्न: इम्मानुएल का क्या अर्थ है?

उत्तर:
इम्मानुएल एक इब्री पुरूष का नाम है, जिसका अर्थ "परमेश्वर हमारे साथ" या "परमेश्वर हमारे साथ है" से है। इम्मानुएल नाम बाइबल में तीन बार दिखाई देता है, यशायाह के पुराने नियम की पुस्तक में दो बार (7:14 और 8:8), और मत्ती के सुसमाचार में एक बार (1:23)।

यशायाह की पुस्तक में, राजा अहाज के समय में जन्म लिए हुए एक बच्चे को इम्मानुएल का नाम दिया गया था, जो राजा के लिए एक संकेत के रूप में बताता है कि यहूदा को इस्राएल और सीरिया के आक्रमणों से राहत मिलेगी: "इस कारण प्रभु आप ही तुम को एक चिह्न देगा। सुनो, एक कुमारी गर्भवती होगी और पुत्र जनेगी, और उसका नाम इम्मानुएल रखेगी" (यशायाह 7:14)। इम्मानुएल नाम ने इस तथ्य को सूचित किया कि परमेश्वर इस छुटकारे में अपने लोगों के साथ अपने मार्गदर्शन और सुरक्षा देने वाली उपस्थिति की स्थापना करेगा। इम्मानुएल नाम के एक बच्चे के बारे में यशायाह की भविष्यद्वाणी का दूसरा, दूरगामी निहितार्थ यीशु मसीह, इस्राएल के प्रतिज्ञा किए हुए मसीह के जन्म से भी सम्बन्धित था।

राजा अहाज के सात सौ वर्षों के बाद, मरियम नाम की नासरत की एक कुँवारी की सगाई यूसुफ से हुई। इससे पहले कि वे विवाह करते, एक स्वर्गदूत ने यूसुफ से मुलाकात की और पुष्टि की कि मरियम पवित्र आत्मा की ओर से एक बच्चे के लिए गर्भ धारण करेगी (मत्ती 1:20–21)। जब बच्चे का जन्म होगा, तो उन्हें उसका नाम यीशु रखना है। मत्ती, यशायाह की भविष्यद्वाणी की पूर्ति को समझते हुए, इस प्रेरित प्रकाशन के रूप में प्रस्तुत करता है: "यह सब इसलिए हुआ कि जो वचन प्रभु ने भविष्यद्वक्‍ता के द्वारा कहा था, वह पूरा हो : 'देखो, एक कुँवारी गर्भवती होगी और एक पुत्र जनेगी, और उसका नाम इम्मानुएल रखा जाएगा' (जिसका अर्थ है 'परमेश्‍वर हमारे साथ')" (मत्ती 1:22–23)।

यीशु ने यशायाह की भविष्यद्वाणी को पूरा किया क्योंकि वह सचमुच "परमेश्वर हमारे साथ" था; वह पूरी तरह से मानवीय था, तौभी पूरी तरह से परमेश्वर था। मसीह अपने लोगों के पास इस्राएल में रहने के लिए आया, क्योंकि यशायाह ने भविष्यद्वाणी की थी। मत्ती ने यीशु को इम्मानुएल के रूप में पहचाना, जो कि देहधारण की जीवित अभिव्यक्ति थी — यह परमेश्वर के पुत्र का एक मनुष्य बनने का आश्चर्यकर्म था और वह हमारे बीच में अपना डेरा बना रहा था ताकि वह हम पर परमेश्वर को प्रकट कर सके। यीशु हमारे साथ परमेश्वर था, जो मानवीय शरीर में प्रकट हुआ (1 तीमुथियुस 3:16)।

यूहन्ना के सुसमाचार ने देहधारण का सुन्दर वर्णन किया: "और वचन देहधारी हुआ; और अनुग्रह और सच्‍चाई से परिपूर्ण होकर हमारे बीच में डेरा किया, और हम ने उसकी ऐसी महिमा देखी, जैसी पिता के एकलौते की महिमा... परमेश्‍वर को किसी ने कभी नहीं देखा, एकलौता पुत्र जो पिता की गोद में है, उसी ने उसे प्रगट किया" (यूहन्ना 1:14–18)।

यीशु में, परमेश्वर हमारे साथ चला और हमारे साथ बात की जैसा कि उसने अदन की वाटिका में आदम और हव्वा के साथ किया था। मसीह के आगमन ने सारी मानवता को दिखाया कि परमेश्वर अपनी प्रतिज्ञाओं को पूरा करने के प्रति विश्वासयोग्य है। यीशु न केवल परमेश्वर हमारे साथ होना का संकेत था, जैसे कि अहाज के समय में एक बच्चे का जन्म लिया था। अपितु एक व्यक्ति यीशु में हमारे साथ परमेश्वर था।

यीशु इम्मानुएल है। वह हमारे साथ परमेश्वर का आंशिक प्रकाशन नहीं है; यीशु अपनी सारी पूर्णता में हमारे साथ परमेश्वर है: "क्योंकि उसमें ईश्‍वरत्व की सारी परिपूर्णता सदेह वास करती है" (कुलुस्सियों 2:9)। यीशु ने स्वर्ग की सारी महिमा को छोड़ दिया और एक दास के रूप धारण कर लिया ताकि वह दिन-प्रतिदिन के हमारे मानवीय संघर्षों में हमारे साथ पहचान कर सके (फिलिप्पियों 2:6–11; इब्रानियों 4:15–16)।

इम्मानुएल हमारा उद्धारकर्ता हैं (1 तीमुथियुस 1:15)। परमेश्वर ने अपने पुत्र को हमारे बीच रहने और हमारे लिए क्रूस पर मरने के लिए भेजा। मसीह के बहाए गए लहू के द्वारा, हम परमेश्वर के साथ मेल-मिलाप को स्थापित कर सकते हैं (रोमियों 5:10; 2 कुरिन्थियों 5:19; कुलुस्सियों 1:20)। जब हम उसके आत्मा से जन्म लेते हैं, तो मसीह हमारे पास रहने के लिए आता है (2 कुरिन्थियों 6:16; गलातियों 2:20)।

हमारा इम्मानुएल सदैव हमारे साथ रहेगा। यीशु के पिता के पास लौटने से पहले, मरे हुओं में से उसके पुनरुत्थान के बाद, उसने यह प्रतिज्ञा की है कि: "देखो, मैं जगत के अन्त तक सदा तुम्हारे संग हूँ" (मत्ती 28:20; और इब्रानियों 13:5 को भी देखें)। कुछ भी हमें कभी भी परमेश्वर से और मसीह में हमारे प्रति उसके प्रेम से अलग नहीं कर सकता (रोमियों 8:35-39)।

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