क्या परमेश्वर इतनी भारी चट्टान बना सकता है कि वह स्वयं उसे न उठा सके?


प्रश्न: क्या परमेश्वर इतनी भारी चट्टान बना सकता है कि वह स्वयं उसे न उठा सके?

उत्तर:
यह प्रश्न परमेश्वर के प्रति सन्देह करने वालों, बाइबल, मसीही विश्वासियों, इत्यादि के द्वारा अक्सर पूछा जाता है। यदि परमेश्वर ऐसी चट्टान को बना सकता जिसे वह स्वयं नहीं उठा सकता, तो इस कारण परमेश्वर सर्वशक्तिमान नहीं हो सकता है। इस तर्क के अनुसार, सर्वशक्तिमान की धारणा आत्म-विरोधाभासी है। इसलिए, परमेश्वर सर्वशक्तिमान नहीं हो सकता। इस कारण, प्रश्न आता है कि, क्या परमेश्वर इतनी भारी चट्टान बना सकता है कि जिसे वह स्वयं ही नहीं उठा सकता? इसका त्वरित उत्तर "नहीं" में है। परन्तु स्पष्टीकरण उत्तर की तुलना में समझना अधिक महत्वपूर्ण है...

यह प्रश्न "सर्वशक्तिमान" या "सर्वसामर्थी" जैसे शब्दों की परिभाषाओं के बारे में एक लोकप्रिय मिथ्याबोध के ऊपर आधारित है। इन शब्दों का अर्थ यह नहीं है कि परमेश्वर कुछ भी कर सकता है। अपितु, वे परमेश्वर की सामर्थ्य की मात्रा का वर्णन करते हैं। सामर्थ्य परिवर्तन — अर्थात् कुछ घटित होने को प्रभावित करने की क्षमता है। परमेश्वर (असीमित होने के कारण) असीमित रूप से सामर्थी है, और बाइबल इस बात की पुष्टि करती है (अय्यूब 11:7-11, 37:23; 2 कुरिन्थियों 6:18; प्रकाशितवाक्य 4:8; इत्यादि)। इसलिए, जो कुछ करना सम्भव है, परमेश्वर उसे कर सकते हैं। तथापि, परमेश्वर ऐसा नहीं कर सकता, जो वास्तव में असम्भव है। ऐसा इसलिए है क्योंकि सच्ची असम्भावना शक्ति की मात्रा पर आधारित नहीं है, अर्थात् वह करे जिसे करना वास्तव में सम्भव है। ऐसा इसलिए नहीं है क्योंकि वास्तविक असम्भवता इस बात पर आधारित नहीं है कि सच में किसी के पास कितनी सामर्थ्य है, यह इस बात पर आधारित है कि वास्तव में क्या सम्भव है। वास्तविक असम्भवता को अधिक सामर्थ्य के जोड़ने से सम्भव नहीं किया जाता है। इसलिए, जब तक कि सन्दर्भ इंगित नहीं करता है (जैसे कि मत्ती 19:26 जहाँ मनुष्य की क्षमता परमेश्वर के विपरीत दिखाई जा रही है), असम्भवता का अर्थ एक ही जैसी बात से है कि परमेश्वर इसमें सम्मिलित है या नहीं।

इसलिए, प्रश्न का पहला भाग एक गलत विचार पर आधारित है — कि परमेश्वर के सर्वशक्तिमान होने का अर्थ यह है कि वह कुछ भी कर सकता है। वास्तव में, बाइबल स्वयं उन बातों को सूचीबद्ध करती है जिसे परमेश्वर नहीं कर सकता है — जैसे झूठ बोलना या स्वयं का इन्कार करना (इब्रानियों 6:18; 2 तीमुथियुस 2:13; तीतुस 1:2)। जिस कारण से वह इन बातों को नहीं कर सकता, वह उसका स्वभाव और उसके स्वयं के स्वभाव की वास्तविकता है। परमेश्वर वह नहीं कर सकता है जिसे वास्तव में किया जाना सम्भव नहीं है, जैसे दो-किनारे वाले त्रिकोण की सृष्टि करना या विवाहित रहते हुए कुंवारा बने रहना। केवल इसलिए कि शब्दों को इस तरह एक साथ नहीं बाँधा जा सकता है का यह अर्थ नहीं है कि यह असम्भव को सम्भव नहीं बनाता है — ये बातें विरोधाभासी हैं, वे वास्तव में असम्भव हैं। अब, इस चट्टान के बारे में क्या कहा जाए? एक चट्टान को उठाने वाली असीम सामर्थ्य को पराजित करने के लिए असीम मात्रा में ही बड़ा होना होगा। परन्तु एक असीमित चट्टान का होना एक विरोधाभास है क्योंकि भौतिक वस्तुएँ अनन्तकालीन नहीं हो सकती हैं। केवल परमेश्वर ही अनन्तकालीन है। दो असीमिताएँ नहीं हो सकती हैं। इस कारण यह प्रश्न यह कह रहा है कि क्या परमेश्वर एक विरोधाभास को बना सकता है — जिसे वह नहीं कर सकता।

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