क्योंकि परमेश्वर पुरुष नहीं है, तो क्या हमें परमेश्वर का उल्लेख करने के लिए पुरुषवाचक सर्वनामों का उपयोग करना बन्द कर देना चाहिए?


प्रश्न: क्योंकि परमेश्वर पुरुष नहीं है, तो क्या हमें परमेश्वर का उल्लेख करने के लिए पुरुषवाचक सर्वनामों का उपयोग करना बन्द कर देना चाहिए?

उत्तर:
हम जानते हैं कि परमेश्वर एक आत्मिक प्राणी है। कठोरता से कहना, उसके पास कोई लिंग नहीं है। तथापि परमेश्वर स्वयं को पुरुषवाचक सर्वनामों और कल्पना के उपयोग के द्वारा स्वयं को मनुष्य के ऊपर प्रकट करना चुना है। बाइबल में, परमेश्वर स्वयं को लिंग-तटस्थता वाले शब्दों का उपयोग करने के द्वारा उल्लेख नहीं करता है; वह पुरुषवाचक शब्दों का उपयोग करता है। चूँकि परमेश्वर ने स्वयं को मनुष्य की भाषा में प्रकट करने के लिए चुना है जो पुरुषवाचक लिंग को निर्दिष्ट करता है, हमें उसी भाषा में उसका उल्लेख करना चाहिए। परमेश्वर को सन्दर्भित करने के लिए पुरुषवाचक सर्वनामों का उपयोग बन्द करने के पीछे बाइबल आधारित कोई कारण नहीं पाया जाता है।

बाइबल में आरम्भ से ही, परमेश्वर ने स्वयं को पुरुषवाचक सर्वनामों का उपयोग करने के द्वारा उल्लेख किया है: "तब परमेश्‍वर ने मनुष्य को अपने स्वरूप के अनुसार उत्पन्न किया, अपने ही स्वरूप के अनुसार परमेश्‍वर ने उसको उत्पन्न किया; नर और नारी करके उसने मनुष्यों की सृष्‍टि की" (उत्पत्ति 1:27)। परमेश्वर आरम्भ में स्वयं को पुरुषवाचक शब्दों से सन्दर्भित करता है। प्राचीन इब्रानी भाषा में व्याकरणिक रूप से तटस्थ-लिंग सर्वनाम नहीं था, इसलिए सभी वस्तुओं को जानबूझकर या तो पुरुषवाचक या स्त्री के व्याकरणिक लिंग दिया गया है। वह सर्वनाम जानबूझकर दिया गया था। पुराने नियम में, परमेश्वर का उल्लेख करने वाले सर्वनाम व्याकरणिक रूप से पुल्लिंग हैं।

यही बात नए नियम में पाई जाती है। पत्रियों (प्रेरितों से लेकर प्रकाशितवाक्य तक) में लगभग 900 वचन ऐसे हैं जहाँ यूनानी शब्द थियोस — एक पुरुषवाचक संज्ञा है — जिसका उपयोग परमेश्वर को सन्दर्भित करने के लिए किया गया है। यद्यपि प्रचलित यूनानी में तटस्थ-लिंग के शब्द पाए जाते हैं, तौभी पुरुषवाचक लिंग में परमेश्वर को सन्दर्भित किया जाता है।

व्याकरणिक निर्माणों के अतिरिक्त, बाइबल में उपयोग की गई कल्पना भी इस बात की पुष्टि करती है कि परमेश्वर ने स्वयं को पुरुष आधारित गुणों के रूप में सन्दर्भित करने के लिए चुना। परमेश्वर का वर्णन करने के लिए कई रूपकों और उपाधियों का उपयोग किया जाता है। एक पिता, राजा और पति के रूप में परमेश्वर के सैकड़ों सन्दर्भ पाए जाते हैं। यीशु ने हमें विशेष रूप से "हमारे पिता" से प्रार्थना करना सिखाया (लूका 11:2)। परमेश्‍वर के पिता के रूप में कई अन्य सन्दर्भ भी हैं, जैसे व्यवस्थाविवरण 32:6, मलाकी 2:10, और 1 कुरिन्थियों 8:6 इत्यादि। परमेश्वर को स्पष्ट रूप से कई वचनों में राजा (रानी नहीं) कहा गया है; उदाहरण के लिए, भजन संहिता 24:10, भजन संहिता 47:2, यशायाह 44:6, और 1 तीमुथियुस 1:17 इत्यादि। उसे यशायाह 54:5 और होशे 2:2, 16 और 19 जैसे स्थानों पर भी पति के रूप में वर्णित किया गया है।

एक स्थान पर एक उपमा का उपयोग करके उसके लोगों को परमेश्वर के द्वारा सांत्वना देने को वैसे उल्लेख किया गया है जैसे कि एक माँ अपने बच्चे को सांत्वना देती है (यशायाह 66:13)। वहाँ भी, परमेश्वर यह नहीं कहता कि वह एक माँ है, केवल वह एक माँ की तरह अपने लोगों को विश्राम देता है। यशायाह 49:15 एक और वचन है जिसमें एक माँ का वर्णन परमेश्वर के वर्णन के लिए किया गया है, परन्तु यह तो तुलना भी नहीं है; यह एक विपरीत वर्णन है: परमेश्वर अपने लोगों की चिन्ता एक दूध पीलाने वाली माता से कहीं अधिक करता है।

हमारे लिए परमेश्वर का सबसे बड़ा प्रकाशन उसका पुत्र, यीशु मसीह है (इब्रानियों 1:2)। देहधारण में, पुत्र एक स्त्री नहीं अपितु एक भौतिक पुरुष के रूप में इस पृथ्वी पर आया। यीशु ने निरन्तर परमेश्वर को अपने पिता के रूप में सन्दर्भित किया, न कि अपनी माँ के रूप में। उसके क्रूस पर चढ़ने से पहले, यीशु ने परमेश्वर से प्रार्थना की, उसे "अब्बा, पिता" कह कर पुकारा (मरकुस 14:36)। अकेले सुसमाचारों में ही, यीशु ने 100 से अधिक बार परमेश्वर को "पिता" कहा है।

एक बार फिर कहना, परमेश्वर आत्मा है; इस अर्थ में वह "पुरुष" नहीं है जिस अर्थ में इस संसार में कोई भी पुरुष होता है। परमेश्वर की कोई भौतिक विशेषताएँ नहीं हैं और न ही कोई आनुवांशिकी है। वह लिंग की सीमा से परे है। ठीक इसी समय, परमेश्वर ने पुरुषवाचक भाषा का उपयोग करते हुए स्वयं को उद्देश्यपूर्ण रूप से प्रकट किया है। परमेश्वर सदैव बाइबल में "वह" के रूप में पाया जाता है। चूँकि परमेश्वर स्वयं को सन्दर्भित करने के लिए पुरुषवाचक सर्वनामों का उपयोग करता है, इसलिए हमें भी परमेश्वर को सन्दर्भित करने के लिए पुरुषवाचक सर्वनामों का उपयोग करते रहना चाहिए।

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