इसका क्या अर्थ है कि परमेश्वर मन को देखता है (1 शमूएल 16:7)?


प्रश्न: इसका क्या अर्थ है कि परमेश्वर मन को देखता है (1 शमूएल 16:7)?

उत्तर:
लोग बाहरी दिखावे को देखकर दूसरों के चरित्र और मूल्य को आंकने की प्रवृति रखते हैं। यदि कोई व्यक्ति लम्बा, अच्छा दिखने वाला, गठीले शरीर वाला और आकर्षक तरीके से कपड़े पहने हुए है, तो उसके पास ऐसे भौतिक गुण होते हैं, जिसकी सामान्य रूप से मनुष्य प्रशंसा और सम्मान करते हैं। अक्सर ये वे भौतिक गुण होते हैं जिनकी खोज हम किसी अगुवे में करते हैं। परन्तु परमेश्वर में व्यक्ति के भीतर देखने की अनोखी क्षमता है। परमेश्वर हमारे वास्तविक चरित्र को जानता है क्योंकि वह “मन को देखता है।”

1 शमूएल 16 में, शमूएल के पास बैतलहमवासी यिशै के घर जा कर अगले राजा का अभिषेक करने का समय आ गया था। जब शमूएल ने यिशै के सबसे बड़े एलीआब को देखा, शमूएल ने जो देखा उससे वह प्रभावित हुआ। नबी ने कहा कि, “निश्‍चय यह जो यहोवा के सामने है वही उसका अभिषिक्‍त होगा” (वचन 6)।

परन्तु परमेश्‍वर ने शमूएल से कहा कि, “न तो उसके रूप पर दृष्‍टिकर, और न उसके कद की ऊँचाई पर, क्योंकि मैं ने उसे अयोग्य जाना है; क्योंकि यहोवा का देखना मनुष्य का सा नहीं है; मनुष्य तो बाहर का रूप देखता है, परन्तु यहोवा की दृष्‍टि मन पर रहती है” (1 शमूएल 16:7)।

शाऊल, इस्राएल का पहला राजा, लम्बा और सुन्दर था। शमूएल कदाचित् शाऊल की तरह किसी की खोज कर रहा था, और एलीआब का शारीरिक दिखावा बहुत ही अधिक भौचक्का कर देने वाला था। परन्तु इस्राएल के राजा के रूप में अभिषेक करने के लिए परमेश्वर के पास एक भिन्न व्यक्ति था। यहोवा ने शमूएल को पहले बताया था कि उसने परमेश्वर के मन के अनुसार एक व्यक्ति की खोज की थी (1 शमूएल 13:14)।

शमूएल ने यिशै के सभी बड़े सातों पुत्रों को देखा, परन्तु प्रभु यहोवा परमेश्वर ने उन सभों को राजा होने के लिए अपने चुनाव से इन्कार कर दिया। परमेश्वर उस की खोज कर रहा था जिसके पास एक विश्वासयोग्य मन था। दाऊद, यिशै का सबसे छोटा पुत्र, जिसे उन्होंने बुलाना भी ठीक नहीं समझा, भेड़ों की चरवाही कर रहा था। शमूएल के अन्य पुत्रों को देख लिए जाने के बाद, उन्होंने दाऊद को बुला भेजा, और प्रभु यहोवा ने कहा, “यह वह है” (1 शमूएल 16:12)।

दाऊद परमेश्वर की पसन्द था — दोषयुक्त परन्तु तौभी विश्वासयोग्य, परमेश्वर के मन के अनुसार चलने वाला एक व्यक्ति। यद्यपि बाइबल कहती है कि वह सुन्दर था (वचन 12), तथापि दाऊद एक आकर्षक व्यक्ति नहीं था। परन्तु दाऊद ने परमेश्वर के अनुसार अपने मन को विकसित किया था। अकेले खेतों के एकान्त में, झुण्डों को चरते हुए, दाऊद परमेश्वर को अपने चरवाहे के रूप में जानता था (भजन संहिता 23 को देखें)।

दिखावा छलावा हो सकता है। बाहरी रूप से यह नहीं पता चलता है कि लोग वास्तव में क्या पसन्द करते हैं। शारीरिक रूप से हमें किसी व्यक्ति के मूल्य या चरित्र या परमेश्वर के प्रति ईमानदारी या विश्वासयोग्यता नहीं दिखाई देती। बाह्य गुण, परिभाषा से, ही सतही होते हैं। नैतिक और आत्मिक विचार परमेश्वर के लिए कहीं अधिक महत्वपूर्ण हैं।

परमेश्वर मन को देखता है। पवित्रशास्त्र में मन एक व्यक्ति का आन्तरिक नैतिक और आत्मिक जीवन होता है। नीतिवचन 4:23 बताता है कि हम जो कुछ भी करते हैं वह हमारे मनों से ही बहता है। मन वह केन्द्रीय स्थान है, जिसका हम आन्तरिक सार हैं: “भला मनुष्य अपने मन के भले भण्डार से भली बातें निकालता है, और बुरा मनुष्य अपने मन के बुरे भण्डार से बुरी बातें निकालता है; क्योंकि जो मन में भरा है वही उसके मुँह पर आता है” (लूका 6:45)।

जिस किसी ने उसे देखा उन सभों को, यहूदा इस्करियोती एक विश्वासयोग्य शिष्य की तरह दिखता था, परन्तु उसका दिखावा धोखा देने वाला था। दूसरे शिष्यों को इस बात का अन्दाज़ा नहीं था कि यहूदा के भीतर क्या चल रहा है। यीशु ही एक ऐसा व्यक्ति था जो यहूदा के मन को जानता था: “क्या मैं ने तुम बारहों को नहीं चुना? तौभी तुम में से एक व्यक्‍ति शैतान है!” (यूहन्ना 6:70)। परमेश्वर का दृष्टिकोण हमारी तुलना में अधिक उच्च, गहरा और समझदार होता है (यशायाह 55:8-9)।

दूसरा इतिहास 16:9 कहता है कि परमेश्वर की आँखें पूरे पृथ्वी पर निरन्तर लगी रहती हैं, ताकि ऐसे लोगों को दृढ़ करे जिनके मन उसके प्रति पूर्ण रूप से प्रतिबद्ध है। परमेश्वर हमारे मनों के भीतर झाँक सकता है, हमारी उत्तेजनाओं की जाँच कर सकता है, और हमारे बारे में जानने वाली सभी बातों को जान सकता है (भजन संहिता 139:1)। परमेश्वर जानता है कि क्या एक व्यक्ति विश्वासयोग्य होगा। परमेश्वर उसे देखता है जिसे लोग नहीं देख सकते हैं।

राजा दाऊद सिद्धता से बहुत दूर था। उसने व्यभिचार और हत्या की (2 शमूएल 11)। परन्तु परमेश्वर ने दाऊद को गहराई से, बने रहने वाले विश्वास के एक व्यक्ति के रूप में देखा जो पूरी तरह से प्रभु यहोवा के प्रति समर्पित था। परमेश्वर ने उसे एक ऐसे व्यक्ति के रूप में देखा, जो सामर्थ्य और मार्गदर्शन के लिए प्रभु यहोवा के ऊपर निर्भर था (1 शमूएल 17:45, 47; 23:2)। परमेश्वर ने उसमें एक ऐसे व्यक्ति को देखा जो अपने पाप और असफलता को पहचानता था और जो पश्चाताप करता और प्रभु से क्षमा माँगता था (2 शमूएल 12; भजन संहिता 51)। परमेश्वर ने दाऊद में एक ऐसे व्यक्ति को देखा जो अपने प्रभु यहोवा से प्रेम करता था; एक ऐसा व्यक्ति जिसने अपने प्रभु यहोवा की आराधना अपने पूरे अस्तित्व के साथ की थी (2 शमूएल 6:14); एक ऐसा व्यक्ति जिसने परमेश्वर की शुद्धता और क्षमा का अनुभव किया था (भजन संहिता 51) और वह परमेश्वर के प्रेम की गहराइयों को समझने के लिए उसके पास आया था (भजन संहिता 13:5–6;)। परमेश्वर ने उसे अपने सृष्टिकर्ता के साथ एक गम्भीरता से भरा हुआ और व्यक्तिगत् सम्बन्ध बनाने वाले व्यक्ति के रूप में देखा। जब परमेश्वर ने दाऊद के मन को देखा, तो उसने अपने मन के अनुसार एक व्यक्ति के होने को देखा (प्रेरितों के 13:22)।

शमूएल की तरह, हम वह नहीं देख सकते हैं जिसे प्रभु यहोवा देखता है, और हमें ज्ञान के लिए उस पर भरोसा करना चाहिए। और हम विश्वास कर सकते हैं कि, जब परमेश्वर हमारे मनों को देखता है, तो वह हमारे विश्वास, हमारे सच्चे चरित्र और व्यक्तियों के रूप में हमारे मूल्य को देखता है।

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