इसका क्या अर्थ है कि परमेश्वर अच्छा है?


प्रश्न: इसका क्या अर्थ है कि परमेश्वर अच्छा है?

उत्तर:
यीशु ने घोषणा की, “कोई उत्तम नहीं, केवल एक, अर्थात् परमेश्‍वर” (लूका 18:19)। पहला यूहन्ना 1:5 हमें बताता है कि “परमेश्‍वर ज्योति है और उसमें कुछ भी अन्धकार नहीं।’’ यह कहना कि परमेश्वर अच्छा या भला है का अर्थ यह हुआ कि परमेश्वर सदैव उसी के अनुसार कार्य करता है जो सही, सच्चा और अच्छा होता है। अच्छाई या भलाई परमेश्वर के स्वभाव का हिस्सा है, और वह अपने स्वभाव का विरोध नहीं कर सकता है। पवित्रता और धार्मिकता परमेश्वर के स्वभाव का हिस्सा है; वह ऐसा कुछ नहीं कर सकता जो अपवित्र या अधर्मी हो। परमेश्वर सब कुछ का मापदण्ड है जो अच्छा है।

यह सच्चाई कि परमेश्वर अच्छा है, इसका अर्थ यह है कि उसके पास कोई बुराई नहीं है, उसकी मंशाएँ और प्रेरणाएँ सदैव अच्छी हैं, वह सदैव वही करता है जो सही है, और उसकी योजना का परिणाम सदैव अच्छा होता है (उत्पत्ति 50:20 को देखें)। उसमें कुछ भी अप्रिय, बुरा या अन्धकारमयी नहीं है। बाइबल सिखाती है कि परमेश्वर की अच्छाई उसके स्वभाव से लेकर प्रत्येक उस चीज़ तक फैली हुई है जिसे वह करता है (भजन संहिता 119:68)। “क्योंकि यहोवा भला है, उसकी करुणा सदा के लिये, और उसकी सच्‍चाई पीढ़ी से पीढ़ी तक बनी रहती है”(भजन संहिता 100:5)।

परमेश्वर की बनाई हुई प्रत्येक वस्तु मूल रूप अच्छी थी: “परमेश्‍वर ने जो कुछ बनाया था सब को देखा, तो क्या देखा, कि वह बहुत ही अच्छा है” (उत्पत्ति 1:31; की तुलना 1 तीमुथियुस 4:4 से करें)। परमेश्वर की अच्छाई को उस व्यवस्था में दिखाया गया है जिसे उसने इस्राएल को दिया था; व्यवस्था पवित्र, धर्मी और अच्छी है (रोमियों 7:12)। “हर एक अच्छा वरदान और हर एक उत्तम दान ऊपर ही से है” (याकूब 1:17)। परमेश्वर केवल वही बना सकता है जो अच्छा हो, क्योंकि वह पूरी तरह से अच्छा है।

परमेश्वर ने बुराई को नहीं बनाया है (हबक्कूक 1:13; 1 यूहन्ना 1:5)। इसकी अपेक्षा, बुराई अच्छाई की अनुपस्थिति है; यह वह सब कुछ है जो परमेश्वर नहीं है। अपनी भलाई के कारण, परमेश्वर पाप से घृणा करता है और किसी दिन उसका न्याय करेगा (रोमियों 2:5)। हमारे अच्छे परमेश्वर की यह इच्छा हमारे लिए कभी नहीं रही है कि हम पाप करें: “क्योंकि न तो बुरी बातों से परमेश्‍वर की परीक्षा हो सकती है, और न वह किसी की परीक्षा आप करता है” (याकूब 1:13)।

हमारे जीवन के परमेश्वर की भलाई हमें उसके प्रति धन्यवाद के लिए अगुवाई करे: “यहोवा का धन्यवाद करो, क्योंकि वह भला अर्थात् अच्छा है; और उसकी करुणा सदा की है” (भजन संहिता 107:1; की तुलना 1 इतिहास 16:34; भजन संहिता 118:1; 136 से करें)। यद्यपि, लोग स्वाभाविक रूप से परमेश्वर का अनुसरण या धन्यवाद नहीं करना चाहते हैं। इसकी अपेक्षा, “मनुष्यों ने अन्धकार को ज्योति से अधिक प्रिय जाना क्योंकि उनके काम बुरे थे” (यूहन्ना 3:19)। पुराने नियम में, इस्राएलियों ने निरन्तर परमेश्वर की अच्छी व्यवस्था को अस्वीकार किया था, अपने प्रति उसकी भलाई को भूल गए, और उनके प्रति अविश्वासयोग्य हो गए थे: “उन्होंने उसके बड़े कामों को और जो आश्‍चर्यकर्म उसने उनके सामने किए थे, उनको भुला दिया” (भजन संहिता 78:11:11)।

अन्ततः, परमेश्वर की भलाई हमें पाप से छुड़ाने की उसकी योजना में दिखाई देती है। सुसमाचार “अच्छा समाचार” है। अपनी भलाई में, परमेश्‍वर ने अपने पुत्र को सिद्ध और निष्कलंक बलिदान बनने के लिए भेजा ताकि हम अपने पापों से क्षमा को प्राप्त कर सकें। परमेश्वर “नहीं चाहता कि कोई नष्‍ट हो, वरन् यह कि सब को मन फिराव का अवसर मिले” (2 पतरस 3:9), और यह “[कि] परमेश्‍वर की कृपा तुझे मन फिराव को सिखाती है” (रोमियों 2:4)।

केवल एक ही है जो पूरी तरह से और वास्तव में अच्छा है — परमेश्वर। यह अच्छा परमेश्वर हमें उसकी खोज करने के लिए और उसे “परखकर देखने के लिए बुलाता है कि यहोवा कैसा भला है! क्या ही धन्य है वह पुरुष जो उसकी शरण लेता है” (भजन संहिता 34:8)।

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