परमेश्वर कितना बड़ा है?


प्रश्न: परमेश्वर कितना बड़ा है?

उत्तर:
प्रश्न "परमेश्वर कितना बड़ा है?" दो विभिन्न सन्दर्भों : गम्भीर दार्शनिक चर्चाओं में और बच्चों के सन्डे स्कूल में उठता है। दूसरे सन्दर्भ में, इसका सामान्य रूप से दिया गया उत्तर "आपकी कल्पना से बड़ा है!" दर्शनविज्ञान या, विशेष रूप से तत्वमीमांसा में, परमेश्वर के आकार के प्रश्न पर चर्चा वास्तविकता की प्रकृति, अलौकिक के अस्तित्व इत्यादि में किए जाने की सम्भावना से है। बुद्धिजीवी उस बच्चे के ऊपर चुटकी ले सकता है जो पूछता है कि, "परमेश्वर कितना बड़ा है?" परन्तु बच्चा वास्तविकता के बारे में दार्शनिक की उलझन पर आसानी से हँस सकता है।

परमेश्वर कितना बड़ा है, इस विषय से निपटने के लिए, हमें पहले यह बताना चाहिए कि परमेश्वर किसी "वस्तु" से नहीं बना है; इसलिए, उसके पास कोई आयाम नहीं है, और स्थान सम्बन्धी विवरण उसके ऊपर लागू नहीं होते हैं। परमेश्वर किसी वस्तु से नहीं "बना" है, अपितु वह निर्विकार है, शाश्वत है, जिसका कोई आरम्भ नहीं है और कोई अन्त नहीं है (प्रकाशितवाक्य 22:13)। वह अस्तित्व में है, और उसके बिना और कुछ भी विद्यमान नहीं हो सकता। परमेश्वर अपनी सृष्टि से परे और स्वतन्त्र रूप से विद्यमान है।

परमेश्वर "आत्मा" है (यूहन्ना 4:24) और इस कारण उसका कोई भौतिक या शारीरिक रूप नहीं है। परमेश्वर की यह विशेषता हमारे लिए समझना कठिन है। हमारे पास एक भौतिक शरीर से जुड़ी एक आत्मा है और यह भौतिक संसार से घनिष्ठता के साथ जुड़ी हुई है। हम स्वाभाविक रूप से लम्बाई, गहराई और ऊँचाई के सन्दर्भ में सोचते हैं। हम महसूस करते हैं कि, यदि हम किसी चीज़ को सही तरीके से माप सकते हैं, तो हम उसे सर्वोत्तम तरीके से समझ सकते हैं। इसलिए हम मापने वाले उपकरणों का आविष्कार करते हैं; हम प्रकाश किरणों को मापने वाले एंग्सट्रम मात्रकों, इंच, मीटर, मील और प्रकाश-वर्ष इत्यादि के सन्दर्भ में बोलते हैं। परन्तु हम समस्या में तब पड़ जाते हैं जब हम परमेश्वर को मापने का प्रयास करते हैं; हम पाते हैं कि वह पदार्थहीन है और इसलिए अथाह है। वह हर तरह से अनन्त है। परमेश्वर परिमाणीकरण का विरोध करता है और उसे जाँचने, उसे वर्गीकृत करने और उसे समझने के हमारे प्रयासों के प्रति स्वयं को अधीन नहीं करेगा।

परमेश्वर कितना बड़ा है? बहुत बड़ा। इससे भी बढ़कर, परमेश्वर सर्वोत्त्कृष्ट है; वह पूर्ण रूप से "अन्य" है कि हम उसे कभी भी पूरी तरह से समझ नहीं सकते हैं। ठीक उसी समय, हम उसके स्वरूप में रचे हुए हैं, और वह हमसे प्रेम करता है (उत्पत्ति 1:27; यूहन्ना 3:16)। उसने अपने वचन और अपने पुत्र, यीशु के माध्यम से हमसे संवाद स्थापित किया है। परमेश्वर के बड़े होने का प्रश्न रविवार के सन्डे स्कूल में बच्चे की ओर से आए या किसी तत्वविज्ञानी की ओर से, इस प्रश्न का उत्तर यही हमारे पास आता है कि: वह इतना "बड़ा" है कि ब्रह्माण्ड बनाने के लिए पर्याप्त है और इतना अधिक "छोटा" कि उसे जानने और प्रेम करने के लिए पर्याप्त है।

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