एक मसीही प्रेमिका में मुझे क्या देखना चाहिए?


प्रश्न: एक मसीही प्रेमिका में मुझे क्या देखना चाहिए?

उत्तर:
बाइबल आज के समय में होने वाली डेटिंग अर्थात् प्रेम सम्बन्धों वाली मुलाकातों का उल्लेख नहीं करती है। इसकी अपेक्षा, यह विवाह के सिद्धान्तों के ऊपर केन्द्रित है। आज डेटिंग को इस बात की जाँच के लिए उपयोग किया जाता है कि क्या पुरुष और स्त्री एक अच्छे विवाह के लिए सम्भावित जीवन साथी हो सकते हैं। इसका अर्थ यह है कि एक मसीही गर्लफ्रेंड या प्रेमिका, सबसे पहले और सबसे महत्वपूर्ण, एक सम्भावित विवाह के लिए प्रार्थी होनी चाहिए। एक मसीही व्यक्ति को अपना जीवन व्यतीत करने के लिए एक स्त्री की खोज करनी चाहिए, न कि कोई ऐसी स्त्री जिसके साथ मस्ती की जाए। यदि कोई व्यक्ति विवाह करने के लिए तैयार नहीं है, तो उसे एक मसीही प्रेमिका की खोज नहीं करना चाहिए।

जब एक पुरूष एक प्रेमिका की खोज करता है, तो उसे उसमें सबसे महत्वपूर्ण गुण यह देखना चाहिए (मानो कि वह सम्भावित रूप से उसकी भविष्य की पत्नी है और ऐसा व्यक्तित्व है, जिसके द्वारा उसके जीवन के ऊपर बहुत अधिक प्रभाव पड़ेगा) कि उसने प्रभु यीशु मसीह में उद्धार को पाया है या नहीं, और वह उसके प्रति जीवन यापन करने में आज्ञाकारिता के साथ रह रही है या नहीं। 2 कुरिन्थियों 6:14 में, पौलुस हमें अविश्‍वासियों के साथ "असमान रूप से जुए में न जुतें" का परामर्श देता है। यदि किसी स्त्री का यीशु मसीह में विश्‍वास नहीं है, तो एक मसीही विश्‍वासी पुरूष के द्वारा उसे अपनी प्रेमिका और/या पत्नी के रूप में स्वीकार करना मूर्खतापूर्ण विचार होगा।

ऐसा कहने का अर्थ यह नहीं हुआ, कि क्योंकि कि एक स्त्री एक मसीही विश्‍वासिन है, इसलिए वह किसी भी मसीही पुरूष के लिए एकदम सिद्ध जोड़ी है। "समान जुए में जुतने" के लिए अन्य पहलुओं को ध्यान में रखना भी महत्वपूर्ण होता है। उदाहरण के लिए, समान आत्मिक लक्ष्यों, सैद्धान्तिक मान्यताओं और जीवन के दृष्टिकोण के प्रति सभी अन्य विचार अत्यन्त महत्वपूर्ण हैं। इसके अतिरिक्त, ऊर्जा स्तर, सामान्य हितों और परिवार और जीवन शैली के बारे में अपेक्षाओं जैसे अधिक व्यावहारिक बातों के ऊपर सोचना भी बुद्धिमानी से भरा हुआ है। कई पुरुष मात्र भावनात्मक या शारीरिक आकर्षण के आधार पर ही स्त्रियों से विवाह करते हैं, और यह विपत्ति की ओर ले जा सकता है।

एक मसीही प्रेमिका में एक पुरूष को किस प्रकार के चरित्र की खोज करनी चाहिए, बाइबल इस के बारे में कुछ दिशानिर्देशों को प्रदान करती है। एक मसीही स्त्री प्रभु के अधीन होने की भावना को प्रदर्शित करेगी। प्रेरित पौलुस पत्नियों से कहता है कि उन्हें अपने पतियों के अधीन ऐसे होना चाहिए जैसे कि प्रभु के (इफिसियों 5:22-24)। यदि वह स्वयं को प्रभु के प्रति अधीन करने में सक्षम नहीं है, तो वह समय आने पर अपने पति के प्रति अधीन होने के मूल्य को नहीं देख पाएगी। यह स्मरण रखना महत्वपूर्ण है कि अधीन होने का चरित्र एक आत्मिक विशेषता है, न कि व्यक्तित्व गुण। एक मधुर व्यक्तित्व आवश्यक नहीं है कि वह एक अधीन होने वाली आत्मा से मेल खाता हो, और न ही एक ऊर्जावान या दृढ़ इच्छाशक्ति रखने वाला व्यक्तित्व अनिवार्य रूप से एक जानबूझकर अधीन होने वाली आत्मा से मेल खाता हो। एक स्त्री परमेश्‍वर के आत्मा के प्रति प्रभावित होने के स्तर तक विनम्र होगी, और वह उसके आत्मा से उस स्तर तक प्रभावित होगी, जिस से कि वह उससे प्रेम कर सके और उसके साथ वचन में समय व्यतीत कर सके।

एक मसीही स्त्री को अपने पति को लाभ पहुँचाना और आशीष देनी चाहिए। बाइबल के उदाहरण के अनुसार उसे ही सहायक होना जैसा सिद्धान्त आदम और हव्वा के आदर्श में ठहरा दिया गया। उसे अपने पति के मिशन और बुलाहट के प्रति एक उपयुक्त सहायक होना चाहिए। उदाहरण के लिए, यदि उसे पास्टर या मिशनरी की बुलाहट है, तो उसे एक ऐसी मसीही प्रेमिका की खोज करनी चाहिए जो वैसी ही बुलाहट को महसूस करती हो। यदि वह एक बड़े परिवार के होने की दृढ़ इच्छा को महसूस करता है, तो उसे एक ऐसी स्त्री मिलनी चाहिए जो वैसे ही महसूस करे। परन्तु इन सब बातों से भी अधिक बढ़कर, बुलाहट के अनुसार हम सभों को मसीह के राजदूत होने के लिए बुलाया गया है (2 कुरिन्थियों 5:20), एक पुरूष को एक ऐसी स्त्री चुननी चाहिए जो उसकी सहायता करे, और इस सम्बन्ध में उस के लिए बाधा न बन जाए। उसे प्रार्थना करने (1 थिस्सलुनीकियों 5:16), प्रोत्साहन देने (1 थिस्सलुनीकियों 5:11), दूसरों की सेवा करने (इब्रानियों 6:10) और जो ज्ञान परमेश्‍वर के वचन की ओर से आता है (कुलुस्सियों 3:16) के प्रति प्रतिबद्धता प्रदर्शित करनी चाहिए। इस तरह की ही एक स्त्री सही रूप में एक मसीही पुरूष के लिए वास्तव में सहायक सिद्ध होगी।

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