बाइबल एक अच्छे मसीही परिवार को कैसे परिभाषित करती है?


प्रश्न: बाइबल एक अच्छे मसीही परिवार को कैसे परिभाषित करती है?

उत्तर:
एक अच्छा मसीही परिवार वह है, जो बाइबल के सिद्धान्तों के अनुसार चलता है और जिस का प्रत्येक सदस्य परमेश्‍वर के द्वारा दी गई अपनी भूमिका को समझता और पूरा करता है। परिवार मनुष्य के द्वारा रूपरेखित की गई संस्था नहीं है। यह मनुष्य के लाभ के लिए परमेश्‍वर के द्वारा बनाई गई थी, और मनुष्य को इसके लिए भण्डारीपन का कार्य दिया गया है। बाइबल में परिवार की मूल इकाई में एक पुरूष, एक स्त्री- अर्थात् जीवन साथी - और उनका वंश या गोद लिए हुए बच्चे सम्मिलित हैं। विस्तारित परिवार में एक ही लहू से सम्बन्धित या विवाह के द्वारा सम्बन्धियों का होना जैसे दादा दादी, भतीजा, भतीजी, चचेरे भाई, चाची, और चाचा सम्मिलित हो सकते हैं। पारिवारिक इकाई के प्राथमिक सिद्धान्तों में से एक यह है कि इसमें सदस्यों के जीवनकाल के लिए परमेश्‍वर के द्वारा निर्धारित प्रतिबद्धता सम्मिलित होती है। पति और पत्नी इसे एक साथ बनाए रखने के लिए उत्तरदायी हैं, इतना होने पर भी आसपास की संस्कृति के वर्तमान दृष्टिकोण इसके साथ खड़े नहीं होते हैं।

नि:सन्देह, एक मसीही परिवार के सदस्यों के लिए पहली आवश्यकता यह है कि उन सभों को मसीही विश्‍वासी होना हैं, जिनका यीशु मसीह के साथ अपने परमेश्‍वर और उद्धारकर्ता के साथ एक सच्चा सम्बन्ध हो। इफिसियों 5:22-33 एक मसीही परिवार में पतियों और पत्नियों के लिए दिशानिर्देशों को प्रदान करता है। पति को अपनी पत्नी से ऐसा प्रेम करना है, जैसा मसीह कलीसिया से प्रेम करता था, और पत्नी को अपने पति का सम्मान करना चाहिए और स्वेच्छा से परिवार में उसके नेतृत्व के अधीन होना चाहिए। पति के नेतृत्व की भूमिका परमेश्‍वर के साथ उसके आत्मिक सम्बन्धों से आरम्भ होनी चाहिए और तत्पश्‍चात् उसे अपनी पत्नी और बच्चों को पवित्रशास्त्र के मूल्यों के प्रति निर्देश देना चाहिए, जिससे परिवार को बाइबल की सच्चाई की ओर ले जाया जा सके। पिता को अपने बच्चों को "प्रभु की शिक्षा और चेतावनी" देने के लिए निर्देश दिया जाता है (इफिसियों 6:4)। एक पिता को अपने परिवार का अच्छा प्रबन्ध करना होता है। यदि वह नहीं करता है, तो वह "विश्‍वास से मुकर गया है, और अविश्‍वासी से भी बुरा बन गया है" (1 तीमुथियुस 5:8)। इसलिए, एक व्यक्ति जो अपने परिवार का प्रबन्ध करने का कोई प्रयास नहीं करता है, वह स्वयं को मसीही नहीं कह सकता है। इसका अर्थ यह नहीं है कि पत्नी परिवार की सहायता नहीं कर सकती है - नीतिवचन 31 दर्शाता है कि एक भक्ति से पूर्ण पत्नी निश्‍चित रूप से ऐसा कर सकती है - परन्तु परिवार के लिए प्रबन्ध करना मुख्य रूप से उसका दायित्व नहीं है; यह उसके पति का है।

स्त्री को अपने पति के लिए सहायक होने (उत्पत्ति 2:18-20) और बच्चों का पालन पोषण करने के उद्देश्य से पुरूष को दिया गया था। एक मसीही विवाह में पति और पत्नी को जीवन पर्यन्त एक दूसरे के प्रति विश्‍वासयोग्य रहना होता है। परमेश्‍वर समानता की घोषणा करता है कि पुरुषों और स्त्रियों को परमेश्‍वर के स्वरूप में रचा गया है और इसलिए वे दोनों ही उसकी दृष्टि में समान रूप से मूल्यवान हैं। इसका अर्थ यह नहीं है, कि पुरुषों और स्त्रियों के जीवन में समान भूमिकाएँ हैं। सामान्य रूप से कहना, स्त्री बच्चों का पालन पोषण और उनकी देखभाल करने में अधिक सक्षम होती हैं, जबकि पुरुष परिवार के लिए प्रबन्ध करने और उसकी रक्षा करने के लिए उत्तम रीति से सुसज्जित होते हैं। इस प्रकार, यद्यपि वे अपनी पदवियों में एक दूसरे के तुल्य हैं, तथापि प्रत्येक मसीही विवाह में कार्य करने की भिन्न भूमिका उनके पास होती है।

एक मसीही विवाह, एक मसीही परिवार के लिए आधारभूत, लिंग से सम्बन्धित बाइबल के निर्देशों का पालन करता है। बाइबल कई संस्कृतियों के ऐसे दृष्टिकोणों का सामना करती है, जो तलाक, विवाह किए बिना एक साथ रहना, और अपने जैसे - लिंग वाले के साथ ही विवाह करने वाले हैं, और जो परमेश्‍वर की दृष्टि में स्वीकार्य नहीं है। बाइबल के मानकों के अनुसार व्यक्त लैंगिकता प्रेम और प्रतिबद्धता के प्रति एक सुन्दर अभिव्यक्ति है। परन्तु विवाह के बाहर, यह पाप है।

बच्चों को मसीही परिवार में दो प्राथमिक उत्तरदायित्व दिया जाता है: अपने माता-पिता की आज्ञा का पालन करना और उनका सम्मान करना (इफिसियों 6:1-3)। माता-पिता की आज्ञा का पालन करना बच्चों का तब तक कर्तव्य है, जब तक कि वे वयस्क होने की आयु तक नहीं पहुँच जाते, परन्तु माता-पिता का सम्मान करना उनके लिए जीवन पर्यन्त का दायित्व है। परमेश्‍वर उन लोगों को आशीष देने की प्रतिज्ञा करता है, जो अपने माता-पिता का सम्मान करते हैं।

अपने आदर्श रूप से, एक मसीही परिवार में सभी सदस्य मसीह और उसकी सेवा के लिए प्रतिबद्ध होते हैं। जब एक पति, पत्नी और बच्चे सभी उनके लिए परमेश्‍वर के द्वारा नियुक्त भूमिकाओं को पूरी करते हैं, तो घर में शान्ति और सद्भाव का शासन होता है। परन्तु, यदि हम मसीह को परिवार का मुखिया न मानते हुए या परमेश्‍वर के द्वारा प्रेम में होकर दिए हुए बाइबल के सिद्धान्तों का पालन किए बिना मसीही परिवार को निर्मित करने का प्रयास करते हैं, तो एक परिवार को दु:खों को उठाना होगा।

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