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प्रश्न

क्या मसीहियों को जन्मदिन मनाना चाहिए?

उत्तर


पवित्रशास्त्र में जन्मदिन मनाने वाले एक मसीही विश्वासी के विरूद्ध कोई निषेध नहीं पाया जाता है, और न ही इसमें ऐसा कुछ इंगित करता है कि हमें इसे मनाने की आवश्यकता है। पवित्रशास्त्र के अनुसार, एक मसीही विश्वासी का जन्मदिन मनाना विवाद-का विषय नहीं है। बाइबल में दो व्यक्तियों: यूसुफ के समय में मिस्र के फिरौन (उत्पत्ति 40:20) और यीशु के समय में राजा हेरोदेस (मत्ती 14:6; मरकुस 6:21) के जन्मदिन मनाने का उल्लेख पाया जाता है। कुछ लोग इन सन्दर्भों को इस बात का प्रमाण मानते हैं कि जन्मदिन मनाना गलत है; चूँकि दोनों व्यक्ति गैर-विश्वासी थे, इसलिए उनके जन्मदिन के उत्सव को मूर्तिपूजा के अनुष्ठान के रूप में देखा जाता है। यद्यपि, यह निष्कर्ष आसानी से निकल कर सामने नहीं आया है। बाइबल इस बात के लिए कोई भी संकेत नहीं देती है कि फिरौन या हेरोदेस के लिए अपना जन्मदिन मनाना गलत था। पवित्रशास्त्र कहीं भी एक मसीही विश्वासी को जन्मदिन मनाने से हतोत्साहित करता है।

रोम के लोगों को लिखी अपनी पत्री में, पौलुस इस बात को सम्बोधित करता है कि किस दिन को आराधना का दिन होना चाहिए, परन्तु कदाचित् हम इसे मसीही जन्मदिन के समारोह के ऊपर भी लागू कर सकते हैं: “कोई तो एक दिन को दूसरे से बढ़कर मानता है, और कोई सब दिनों को एक समान मानता है। हर एक अपने ही मन में निश्‍चय कर ले। जो किसी दिन को मानता है, वह प्रभु के लिये मानता है। जो खाता है, वह प्रभु के लिये खाता है, क्योंकि वह परमेश्‍वर का धन्यवाद करता है, और जो नहीं खाता, वह प्रभु के लिये नहीं खाता और परमेश्‍वर का धन्यवाद करता है…।” (रोमियों 14:5–6)। यदि एक मसीही विश्वासी एक विशेष दिन को जन्मदिन के रूप में मानते हुए मनाता है, तो यह ठीक है; यदि कोई विश्वासी जन्मदिन नहीं मनाता है, तो भी ठीक है। प्रत्येक को "अपने मन में निश्चय कर लेना चाहिए।"

इस बात की तुलना में सबसे अधिक महत्वपूर्ण बात यह है कि चाहे कोई मसीही विश्वासी जन्मदिन मनाए या नहीं, वह अपनी सभी गतिविधियों में प्रभु की महिमा करता है या नहीं (1 कुरिन्थियों 10:31)। यदि कोई मसीही जन्मदिन के समारोह का आयोजन करता है, तो समारोह को प्रभु की महिमा करनी चाहिए; पाप से भरे हुए कार्य जन्मदिन समारोह का अंश नहीं होना चाहिए। यदि कोई मसीही विश्वासी या विश्वासिन जन्मदिन मनाता या मनाती है, तो उसे अपना समय परमेश्वर की महिमा करने वाली बातों से भरनी चाहिए।

चाहे कोई मसीही विश्वासी जन्मदिन मनाए है या नहीं, उसे मसीह में अपने भाइयों और बहनों के प्रति स्पष्ट विवेक और प्रेम के लिए प्रयासरत् रहना चाहिए। जन्मदिन मनाने वालों का तिरस्कार नहीं करना चाहिए और जो लोग जन्मदिन नहीं मनाते हैं, उन्हें निम्न स्तर पर नहीं देखा जाना चाहिए। अन्य विषय जिन्हें पवित्रशास्त्र में विशेष रूप से सम्बोधित नहीं किया गया है, हमें व्यक्तिगत पसन्द के अनुसार जन्मदिन मनाने या न मनाने की स्वतन्त्रता है।

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