बाइबल निष्ठा के बारे में क्या कहती है?


प्रश्न: बाइबल निष्ठा के बारे में क्या कहती है?

उत्तर:
पुराने नियम में, इब्रानी शब्द "निष्ठा" का अनुवाद जिस अर्थ में किया गया है, वह "निर्दोष, पूर्णता, सिद्धता, ईमानदारी, दृढ़ता, सच्चाई, खरेपन" की स्थिति है। नए नियम में निष्ठा का अर्थ ईमानदारी और अच्छे कार्यों की एक पद्धति का अनुसरण करने से है।"

यीशु निष्ठा का एक आदर्श उदाहरण है। बपतिस्मा लेने के पश्‍चात्, वह चालीस दिनों और रातों के लिए उपवास करने के लिए जंगल में चला गया, इस समय में शैतान उसके सबसे कमजोर समय में उसके पास आया और उसकी निष्ठा को तोड़ने का प्रयास करने लगा। यीशु एक ही समय में पूर्ण मनुष्य और पूर्ण परमेश्‍वर था, और वह हमारी तरह हर तरह की परीक्षा में पड़ा, तौभी उसने कभी पाप नहीं किया (इब्रानियों 4:15); यही निष्ठा की परिभाषा है। यीशु एकमात्र ऐसा व्यक्ति है, जो बिना किसी दोष के, पूर्ण, सिद्ध रूप से सत्य और सदैव अच्छे कार्यों का प्रतिरूप दिखाने वाला था।

मसीही विश्‍वासियों को यीशु की तरह बनने के लिए बुलाया गया है। मसीह में, हम नई सृष्टि हैं और परमेश्‍वर के सामने बिना किसी दोष के स्वीकार किए जा सकते हैं (2 कुरिन्थियों 5:17, 21; इफिसियों 1:4-8)। मसीह में, हमारे भीतर काम करने के लिए, हमें पवित्र आत्मा वास करने के लिए दिया गया है, जो हमें यीशु की तरह बना रहा है (रोमियों 8:29; 2 कुरिन्थियों 3:18)। हमें "काँपते हुए अपने अपने उद्धार का कार्य पूरा करते जाना है; क्योंकि परमेश्‍वर ही है जिसने अपनी सुइच्छा निमित्त तुम्हारे मन में इच्छा और काम, दोनों बातों के करने का प्रभाव डाला है" (फिलिप्पियों 2:12–13)। यह परमेश्‍वर की सामर्थ्य है कि हम निष्ठा में बढ़ते चले जाते हैं। हमें परमेश्‍वर का पालन करने के लिए कहा जाता है, और ऐसा करने में, हम न समझौता की जाने वाली नैतिकता और निष्ठा वाले लोग हो जाते हैं। मसीही विश्‍वासियों को ऐसे लोग होने चाहिए, जो सत्य का पालन करते हैं और जो भले कार्य करते हैं।

हमारे संसार में "निष्ठा" आज नैतिक शुद्धता के निहितार्थ को देती है। मसीही विश्‍वासियों को ऐसे लोग होना चाहिए, जिन्हें रिश्‍वत नहीं दी जा सकती या जिनके साथ समझौता नहीं किया जा सकता क्योंकि हम लोगों की अपेक्षा परमेश्‍वर की सेवा करते हैं (कुलुस्सियों 3:17, 23; प्रेरितों 5:29)। हम ऐसे लोग हैं, जो अपने शब्दों पर बने रहते हैं (मत्ती 5:27; याकूब 5:12)। हम अपने आस-पास के लोगों को शब्द और कर्म दोनों में प्रेम करते हैं (1 यूहन्ना 3:17-18; याकूब 2:17-18; इफिसियों 4:29)। हमें परमेश्‍वर में विश्‍वास करने के लिए कहा गया है और इसलिए अपने सभी मार्गों में उसका पालन करें (यूहन्ना 6:19; 15:1-17)। हमारा जीवन परमेश्‍वर में हमारे विश्‍वास के साथ मेल खाना चाहिए और हम में एक ऐसा विश्‍वास उत्पन्न होना चाहिए कि उसके मार्ग सबसे अच्छे हैं (नीतिवचन 3:5–6)।

एक ऐसे संसार में निष्ठा के साथ रहना, जहाँ भ्रष्टता को पसन्द किया जाता है, जिसके साथ हम हमारी लड़ाई का उल्लेख नहीं करते हैं, चुनौतीपूर्ण है। पहला पतरस 3:13-18 यह साहस देता है कि: “यदि तुम भलाई करने के लिये उत्तेजित रहो तो तुम्हारी बुराई करनेवाला फिर कौन है? यदि तुम धर्म के कारण दु:ख भी उठाओ, तो धन्य हो; पर लोगों के डराने से मत डरो, और न घबराओ, पर मसीह को प्रभु जानकर अपने अपने मन में पवित्र समझो। जो कोई तुम से तुम्हारी आशा के विषय में कुछ पूछे, उसे उत्तर देने के लिये सर्वदा तैयार रहो, पर नम्रता और भय के साथ; और विवेक भी शुद्ध रखो, इसलिये कि जिन बातों के विषय में तुम्हारी बदनामी होती है उनके विषय में वे, जो मसीह में तुम्हारे अच्छे चालचलन का अपमान करते हैं, लज्जित हों। क्योंकि यदि परमेश्‍वर की यही इच्छा हो कि तुम भलाई करने के कारण दु:ख उठाओ, तो यह बुराई करने के कारण दु:ख उठाने से उत्तम है। इसलिये कि मसीह ने भी, अर्थात् अधर्मियों के लिये धर्मी ने, पापों के कारण एक बार दु:ख उठाया, ताकि हमें परमेश्‍वर के पास पहुँचाए; वह शरीर के भाव से तो घात किया गया, पर आत्मा के भाव से जिलाया गया।” निष्ठा के साथ जीवन यापन करना मसीह के उदाहरण का पालन करना है। और हम केवल उसकी शक्ति के द्वारा ही सच्ची निष्ठा के साथ जीवन व्यतीत कर सकते हैं, जिसे उसने विनम्रतापूर्वक और स्वतन्त्र रूप से उन सभी को दिया है, जो उसके है (यूहन्ना 16:33; फिलिप्पियों 1:6; इफिसियों 1:13-14)।

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