बाइबल मूर्खता के बारे में क्या कहती है?


प्रश्न: बाइबल मूर्खता के बारे में क्या कहती है?

उत्तर:
मूर्खता उस व्यक्ति का परिणाम है, जो उस बुद्धि का दुरुपयोग करता है, जिसे परमेश्‍वर ने उसे दिया है। एक मूर्ख गलत निर्णय लेने के लिए अपने तर्क कौशल का उपयोग करता है। सबसे मूलभूत प्रकार की मूर्खता परमेश्‍वर के अस्तित्व को इन्कार करना या परमेश्‍वर "नहीं" है, कहना है (भजन संहिता 14:1)। बाइबल एक शीघ्र क्रोधित होने जाने वाले (नीतिवचन 14:16-17), विकृत बोलचाल (नीतिवचन 19:1), और माता-पिता के प्रति अवज्ञाकारी (नीतिवचन 15:5) होने को मूर्खता के साथ सम्बद्ध करती है। हम निहित मूर्खता के लिए उत्पन्न होते हैं, परन्तु अनुशासन हमें ज्ञान में प्रशिक्षित करने में सहायता करता है (नीतिवचन 22:15)।

नीतिवचन 19:3 कहता है कि मूर्खता अनुत्पादक है: "मूढ़ता के कारण मनुष्य का मार्ग टेढ़ा होता है..." मरकुस 7:22 में यीशु एक ऐसे शब्द का उपयोग करता है, जिसका अर्थ "संवेदनहीनता" है और इसका अनुवाद "मूर्खता" है। उस सन्दर्भ में यीशु वर्णन करता है कि जो कुछ मनुष्य के मन से बाहर आता है, वही उसे दूषित करता है। मूर्खता उन प्रमाणों में से एक है, कि मनुष्य के पास अपवित्र, पापी स्वभाव है। नीतिवचन 24: 9 कहता है कि, "मूर्खता का विचार भी पाप है..।" मूर्खता, वास्तव में, परमेश्‍वर की व्यवस्था को तोड़ना है, क्योंकि पाप अधर्म है (1 यूहन्ना 3:4)।

मूर्खों के लिए, परमेश्‍वर का मार्ग मूर्खता है: “क्योंकि क्रूस की कथा नाश होनेवालों के लिये मूर्खता है, परन्तु हम उद्धार पानेवालों के लिये परमेश्‍वर की सामर्थ्य है…” (1 कुरिन्थियों 1:18; की तुलना वचन 23 से करें)। सुसमाचार उद्धार न पाए हुए लोगों के लिए मूर्खता प्रतीत होता है, क्योंकि यह उनके लिए कोई अर्थ नहीं रखता है। मूर्ख परमेश्‍वर की बुद्धि की समझ से पूरी तरह से बाहर है। सुसमाचार अविश्‍वासी की मूल बुद्धि और तर्क के विरूद्ध जाता है, तौभी "... परमेश्‍वर को यह अच्छा लगा कि इस प्रचार की मूर्खता के द्वारा विश्‍वास करनेवालों को उद्धार दे" (1 कुरिन्थियों 1:21)।

मसीह में विश्‍वास करने वालों को परमेश्‍वर का स्वभाव प्राप्त होता है (2 पतरस 1:4), जिसमें मसीह का मन सम्मिलित है (1 कुरिन्थियों 2:16)। पवित्र आत्मा के वास करने की सामर्थ्य के ऊपर भरोसा करके, विश्‍वासी मूर्खता को अस्वीकार कर सकता है। उनके विचार प्रभु को प्रसन्न कर सकते हैं, और वह ऐसे निर्णय ले सकते हैं, जो परमेश्‍वर को महिमा प्रदान करें क्योंकि वह अपने जीवन और अपने आस-पास के लोगों के जीवन को समृद्ध करता है (फिलिप्पियों 4: 8–9; इफिसियों 5:18-6:4)।

जब बात हमारे शाश्‍वत गंतव्य की आती है, तो या तो एक व्यक्ति मूर्ख है, जिसका अर्थ यह हुआ है कि वह मसीह के सुसमाचार को अस्वीकार करता है, या वह एक बुद्धिमान व्यक्ति है, जिसका अर्थ है कि वह मसीह में विश्‍वास करता है और अपने जीवन को उसके प्रति समर्पित करता है (मत्ती 7:24-27 को देखें)। मसीही विश्‍वासी को पता चलता है कि सुसमाचार - जो उसने सोचा था कि वह मूर्खता थी - वास्तव में परमेश्‍वर का ज्ञान है, जो उसे अनन्त मुक्ति प्रदान करता है।

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