बाइबल तरस के बारे में क्या कहती है?


प्रश्न: बाइबल तरस के बारे में क्या कहती है?

उत्तर:
बाइबल में इब्रानी और यूनानी शब्दों से अनुवाद किए गए "तरस" का अर्थ "किसी पर दया करना, सहानुभूति को अहसास देना और दया दिखाना" है। हम जानते हैं कि, बाइबल के अनुसार, परमेश्वर "परन्तु प्रभु, तू दयालु और अनुग्रहकारी परमेश्‍वर है, तू विलम्ब से कोप करनेवाला और अति करुणामय है” (भजन संहिता 86:15)। परमेश्वर के सभी गुणों की तरह, उसका तरस अनन्तकालीन और शाश्वत है। उसकी करूणा कभी असफल नहीं होती; वह प्रत्येक भोर नई होती है (विलापगीत 3:22-23)।

यीशु मसीह, परमेश्वर के पुत्र ने पिता के सभी गुणों को अपने तरस में सम्मिलित करते हुए प्रगट किया है। जब यीशु ने अपने मित्रों को लाज़र की कब्र पर रोते हुए देखा, तो उसे उन पर तरस आया और वह उनके साथ रोने लगा (यूहन्ना 11:33-35)। दूसरों के प्रति दु:ख से भरते हुए तरस खाते हुए, यीशु ने उसके पास आने वाली बड़ी भीड़ को चँगा किया (मत्ती 14:14), साथ ही साथ उन्हें भी जिन लोगों ने उससे चँगाई की माँग की थी (मरकुस 1:40-41)। जब उसने चरवाहे के बिना भेड़ के रूप में एक बड़ी भीड़ को देखा, तो उसके तरस ने उसकी अगुवाई की कि वह उन्हें ऐसी बातों की शिक्षा दे, जिन्हें इस्राएल के झूठे चरवाहों ने देना छोड़ दिया था। याजक और शास्त्री घमण्ड से भरे हुए और भ्रष्ट थे; उन्होंने सामान्य लोगों का तिरस्कार किया और उनकी उपेक्षा की, परन्तु यीशु को उन पर दया आई और उसने उन्हें शिक्षा दी और प्रेम किया।

यह पूछे जाने पर कि सबसे बड़ी आज्ञा क्या थी, यीशु ने उत्तर दिया कि यह अपने पूरे मन, हृदय और शक्ति के साथ परमेश्वर से प्रेम करना है। परन्तु उसने कहा कि इस के साथ दूसरी आज्ञा "यह है कि: 'अपने पड़ोसी से अपने समान प्रेम करो" (मत्ती 22:34-40)। फरीसी ने उससे पूछा था कि परमेश्वर की कौन सी एक आज्ञा सबसे बड़ी है, परन्तु यीशु ने दो यह कहते हुए प्रदान की कि न केवल हमें क्या करना है, अपितु यह भी कि इसका उपयोग कैसे करना है। अपने पड़ोसी से स्वयं के जैसा प्रेम करना, परमेश्वर के प्रति अपनी प्रेममयी भक्ति का स्वाभाविक परिणाम है।

पहला यूहन्ना 3:17 कहता है कि, "पर जिस किसी के पास संसार की सम्पत्ति हो और वह अपने भाई को कंगाल देखकर उस पर तरस खाना न चाहे, तो उसमें परमेश्‍वर का प्रेम कैसे बना रह सकता है?" मूल रूप से उसके स्वरूप में निर्मित किए गए, मनुष्य को परमेश्वर के गुणों को तरस सहित प्रगट करना है। इस से यह बात सामने आती है कि "यदि कोई कहे, 'मैं परमेश्‍वर से प्रेम रखता हूँ,' और अपने भाई से बैर रखे तो वह झूठा है; क्योंकि जो अपने भाई से जिसे उसने देखा है प्रेम नहीं रखता, तो वह परमेश्‍वर से भी जिसे उसने नहीं देखा प्रेम नहीं रख सकता”(1 यूहन्ना 4:20)। बाइबल स्पष्ट है कि तरस परमेश्वर और परमेश्वर के लोगों का भी गुण है।

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