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प्रश्न

अमालेकवंशी कौन थे?

उत्तर


अमालेकवंशियों के गोत्र का उल्लेख पहली बार अब्राहम के समय में हुआ है (उत्पत्ति 14:7)। यद्यपि, अमालेकवंशी का उल्लेख उत्पत्ति 10 में जातियों की तालिका में नहीं किया गया है, तथापि उसे गिनती 24:20 में उन्हें "अन्यजातियों में श्रेष्ठ" कहा जाता है। उत्पत्ति 36 में एलीपज के पुत्र और एसाव के पोते अमालेक के वंशज का उल्लेख मिलता है (वचन 12 और 16)। इस तरह, अमालेकवंशी का किसी तरह से आपस में दूर के सम्बन्ध तो थे, परन्तु वे एदोमवंशियों से भिन्न थे।

पवित्रशास्त्र, अमालेकियों और इस्राएलियों के मध्य में लम्बे समय तक चलने वाले झगड़े और पृथ्वी पर से अमालेकियों का नाश होने के परमेश्‍वर के दिशानिर्देश को लिपिबद्ध करता है (निर्गमन 17:8–13; 1 शमूएल 15:2; व्यवस्थाविवरण 25:17)। क्यों परमेश्‍वर उसके लोगों को एक पूरे गोत्र को मिटा देने के लिए कहेगा, यह एक कठिन प्रश्‍न है, परन्तु इतिहास पर दिए जाने वाली एक दृष्टि कुछ समझ को प्रदान कर सकती है।

कई रेगिस्तानी गोत्रों की तरह, अमालेकवंशी खानाबदोश लोग थे। गिनती 13:29 उन्हें नीगवे के मूल निवासी के रूप में देखता है, जो कि मिस्र और कनान के मध्य पाया जाने वाला रेगिस्तान था। बेबीलोन के लोगों ने उन्हें सुते, मिस्रियों को सितीयु कहा और अम्रना की पट्टियों पर उन्हें खब्बाती या "लूटेरे" कहा गया है।

इस्राएलियों के प्रति अमालेकियों की अविश्‍वसनीय क्रूरता का आरम्भ रपीदीम के आक्रमण के साथ हुआ (निर्गमन 17:8–13)। इसे व्यवस्थाविवरण 25:17-19 में इस चेतावनी के साथ दुहराया गया है: “स्मरण रख कि जब तू मिस्र से निकलकर आ रहा था तब अमालेक ने तुझ से मार्ग में क्या किया, अर्थात् उनको परमेश्‍वर का भय न था; इस कारण उसने जब तू [सामान्य रूप से स्त्रियाँ और बच्चे] मार्ग में थका-माँदा था, तब तुझ पर चढ़ाई करके जितने निर्बल होने के कारण सबसे पीछे थे उन सभों को मारा। इसलिये जब तेरा परमेश्‍वर यहोवा उस देश में, जो वह तेरा भाग करके तेरे अधिकार में कर देता है, तुझे चारों ओर के सब शत्रुओं से विश्राम दे, तब अमालेक का नाम पृथ्वी पर से मिटा डालना; और तुम इस बात को न भूलना!"

बाद में अमालेकियों ने कनानियों के साथ मिलकर होर्मा पर इस्राएलियों के ऊपर आक्रमण किया (गिनती 14:45)। न्यायियों में उन्होंने मोआबियों (न्यायियों 3:13) और मिद्यानियों (न्यायियों 6:3) के साथ मिलकर इस्राएलियों के विरूद्ध युद्ध किया था। वे इस्राएलियों की भूमि और खाद्य आपूर्ति के निरन्तर नष्ट करने के लिए उत्तरदायी थे।

1 शमूएल 15:2–3 में, परमेश्‍वर ने राजा शाऊल से कहा था, “मैं सेनाओं का यहोवा यों कहता है, ‘मुझे स्मरण है कि अमालेकियों ने इस्राएलियों से क्या किया; जब इस्राएली मिस्र से आ रहे थे, तब उन्होंने मार्ग में उनका सामना किया। इसलिये अब तू जाकर अमालेकियों को मार, और जो कुछ उनका है उसे बिना कोमलता किए नष्‍ट कर; क्या पुरुष, क्या स्त्री, क्या बच्‍चा, क्या दूधपीता, क्या गाय-बैल, क्या भेड़-बकरी, क्या ऊँट, क्या गदहा, सब को मार डाल।”

इसके प्रतिउत्तर में, राजा शाऊल सबसे पहले इस्राएल के मित्रों, केनवंशियों को चेतावनी देता कि वे इस क्षेत्र को छोड़ दें। तब वह अमालेकियों के ऊपर आक्रमण करता है, परन्तु वह अपने कार्य को पूरा नहीं करता है। वह अमालेकी राजा अगाग को जीवित बचे रहने की अनुमति देता है, और उसकी लूट को अपने और अपनी सेना के लिए ले लेता है, और ऐसा करने के विषय में झूठ बोलता है। परमेश्‍वर और उसके आदेशों के विरूद्ध शाऊल का विद्रोह इतना अधिक गम्भीर था कि परमेश्‍वर ने उसे राजा के रूप में अस्वीकृत कर दिया (1 शमूएल 15:23)।

बचे हुए अमालेकवंशी निरन्तर इस्राएलियों की आने वाली पीढ़ियों को सैकड़ों वर्षों तक परेशान करते रहते और लूटते रहते हैं। पहले शमूएल 30 में सिकलग के ऊपर चढ़ाई को लिपिबद्ध किया गया है, यह यहूदियों का एक गाँव था, जहाँ दाऊद की सम्पत्ति थी। अमालेकियों ने इस गाँव को जला दिया और दाऊद की दो पत्नियों सहित सभी स्त्रियों और बच्चों को बन्दी बना लिया। दाऊद और उसके लोगों ने अमालेकियों को पराजित कर दिया और अपने सभी बंधकों को बचा लिया था। तथापि कुछ हजार अमालेकवंशी बच गए। बहुत बाद में, राजा हिजकिय्याह के शासनकाल के समय, शिमोनियों के एक समूह ने "उनका सत्यानाश कर डाला" जो सेईर के पहाड़ी देश में रहा करते थे (1 इतिहास 4:42–43)।

अमालेकवंशियों का अन्तिम उल्लेख एस्तेर की पुस्तक में मिलता है, जहाँ अमालेकवंशी राजा अगाग का वंशज हम्मदाता हामान, राजा क्षयर्ष को आदेश देने के द्वारा सभी यहूदियों को फारस में नष्ट करने के लिए प्रेरित करता है। यद्यपि, फारस में परमेश्‍वर ने यहूदियों को बचाया, और इसकी अपेक्षा हामान, उसके पुत्रों और इस्राएल के शेष शत्रुओं को नष्ट कर दिया गया (एस्तेर 9:5-10)।

अमालेकियों को यहूदियों से घृणा थी और परमेश्‍वर के लोगों को नष्ट करने के उनके निरन्तर के प्रयासों के कारण उनका अन्त में नाश हो गया। उनका अन्त उन सभों के लिए एक चेतावनी होनी चाहिए जो परमेश्‍वर की योजना को विफल करने का प्रयास करेंगे या जिसे परमेश्‍वर ने आशीषित किया है, उसे शाप देंगे (उत्पत्ति 12:3 को देखें)।

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