क परमेश्वर क्या अस्तित्व है? क परमेश्वर कै अस्तित्व क्या कउनो प्रमाण है?



प्रश्न: क परमेश्वर क्या अस्तित्व है? क परमेश्वर कै अस्तित्व क्या कउनो प्रमाण है?

उत्तर:
परमेश्वर क्या अस्तित्व प्रमाणित या अस्वीकृत नहीं होइ सकत बाइबल भी य कहत थ्ी कि हमै विश्वास के द्वारा य तथ्य का स्वीकार कराचही कि परमेश्वर क्या अस्तित्व है, "अउ विश्वास बिना वहिका ख्ूस करब मूश्किल हवए, कहेसे परमेश्वर कै पास ऑवए वाले का विश्वास करा चही, कि व है, इउ इपए हेरऐ वाले का प्रतिफल देत है" (इब्रानियों 11:6)। यदि परमेश्वर के इनतना के इच्छा रही है , तो व बस यूॅही प्रकट होइजात अउ पूरे संसार क प्रमाणित कइ देत कि वहका अस्तित्व हवए परन्तु यदि व इनतना करत , तो फे विश्वास के जरूरत न होत " यीशु वइसे कहेन , ' तऐ मोही देख्े हा , यहीसे विश्वास केहे हा ; धन्य हैं व जोकोउ बिना देखे विश्वास करत है '"

यहका यमतलब नहीं आए कि , परमेश्वर कै अस्तित्व क्या कउनो प्रमाण नही आऐ । बाइबल घोषणा करत थ्ी कि , " आकाश ईश्वर के महिमा क वर्णन करत है” ; अउ आकाशमण्डल उसकी हस्तकला क प्रगट करत है। दिन से दिन बातें करत है , और रात के रात ज्ञान सिखावत थ्ी न तो कउनो बोलो हवऐ न तो कउनो भाषा जहाँ वहका शब्द सुनाई नहीं देतहै। वहका स्वर सारी पृथ्वी म गूँज ग है ,अउ वहका वचन जगत कै छोर तक पहूॅच गा है" (भजन संहिता 19:1-4)। त्रइन कइत देख् के , इस ब्रह्माण्ड की विशालता क समझते हुए , प्रकृति कै आश्चर्यों म ध्यान लगावत हुए , सूरजनिकरए के सून्दरता क दयाख्त हूऐ. य सारी वस्तुएँ एक सृष्टिकर्ता परमेश्वर कइत इसारा करत थ्ी यदि य काफी नहीं आऐू, तो हमऐ स्वयं के हृदयों म परमेश्वर कै बरे एक प्रमाण है। सभोपदेशक 3:11 हमऐ कहत है कि", उसने मनुष्यों कै मन मा अनादि.अनन्त काल क्या ज्ञान उत्पन्न किहिस है।" हमऐ अपऐ भ्ीतर कि बहिराइ म ऐसी कउनो पहिचान हवऐ कि य जीवन कै बाद भी कुछ हवऐ अउ य संसार से परे भी कोउ है। हम य ज्ञान क बौद्धिक रूप म झुठला सकिम हैं , पर हम मा अउ हमैऐ चारों ओर परमेश्वर के उपस्थिति फिर भी स्पष्ट रूप म बनी हवऐ य सब कै बाद भी , बाइबल हमऐ चितावत थ्ी कि कूछ लोग फिर भी परमेश्वर कै अस्तित्व क होऐ क अस्वीकार करिहऐ s, " मूर्ख अपऐ मन मा कहिस , ' कि कउनो परमेश्वर हइ नहीं '" ( भजन क्योंकि अब तक क इतिहास म, सब संस्कृतियों म ,सब सभ्यताओं म , सब महाद्वीपों म अधिकांश लोगों का बहुमत कउनो तना से परमेश्वर कै अस्तित्व म विश्वास राखत हि , तो य विश्वास क्या कारन कूछ;या कउनोद्ध तो होइ ।

परमेश्वर कै अस्तित्व कै बरे बाइबल आधारित दलीलों कै अतिरिक्त , हिआ तार्किक दलील भी हॅवऐ पहली , दलील तत्वमीमांसात्मक हवए तत्वविज्ञानी दलील का सर्वाधिक चर्चित रूप आधारभूत रूप म य विचारधारा का उपयोग करत थ्ी कि परमेश्वर को ही परमेश्वर कै अस्तित्व क्या प्रमाण देवाचाहि व परमेश्वर कै य परिभाषा से आरम्भ होत है कि व , " इत्त बड़ा है कि वइसे बड़े की कल्पना ही नहीं होइसकत।"

फे य बहस उठ खड़ी होत थी कि अस्तित्व म होऐ से अस्तित्व म न होऐ से ज्यादा बड़ा है , अउ यहिसे सबसे बड़े कल्पनीय प्राणी क अस्तित्व म होवाचाहि यदि परमेश्वर क्या अस्तित्व नहीं आऐ, तो परमेश्वर सबसे बड़ा कल्पनीय प्राणी नहीं होइ सकत अउ य बात परमेश्वर की परिभाषा का ही खण्डन करदेइ|

दूसर दलील सोद्देश्यवादी हवऐ। सोद्देश्यवादी दलील यह घोषणा करत है कि कहेसे ब्रह्माण्ड एक ऐसा आश्चर्यजनक खाके क प्रदर्शित करत है , इस लिए हूॅआ पर कोई ईश्वरीय खाकाकार होवाचहि उदाहरण कै रूप म , यदि धरती विशेषकर सूर्ज से कुछ सौ मील पास या दूर होत , तो व जीवन के उस परकार से सहायता करय योग्य न होत जत्ता व आज कै समय म करत है यदि हमऐ वातावरण म विद्यमान तत्व हिआ तक कि मात्र कुछ ही प्रतिशत भिन्न होत , तो पृथ्वी म लगभग सारे जीवित प्राणी ही मर जइहॅए। एक एकल प्रोटीन के अणु के संयोग से बनने की संभावनाएं 10243 में से 1 ही होती है (इसका अर्थ है कि 10 के बाद 243 शून्यों का आना)। एक एकल कोशिका लाखों अणुओं से मिल कर बनी रहत थी

परमेश्वर कै अस्तित्व कै विषय म जो तीसरी तार्किक दलील हवए व ब्रह्माण्ड सम्बन्धित दलील है। हर परिनाम कै पाछू कउनो कारन होवा चाहि य ब्रह्माण्ड अउ यहिकइ हर वस्तु एक परिणाम है। क्उनो म कउनो इनतना के वस्तू होवा चही जेहके कारन हर वस्तू अस्तित्व म आई। आखिरकार , कउनो वस्तु ष्कारण.रहितष् भी होवा चही ताकि अन्य सब वस्तूओ कै अस्तित्व म आूवए क्या कारण बनैए व ष्कारण.रहितष् वस्तु ही परमेश्वर हवए ।

चौथी दलील नैतिक दलील कै रूप से जानी जात थी । इतिहास म अब तक प्रत्येक संस्कृति कै पास किसी न किसी प्रकार की व्यवस्था होत आई है। हर एक कै पास सही अउ गलत क्या बोध है। हत्या , झूठ , चोरी अउ अनैतिकता को लगभग विश्वव्यापी रूप म अस्वीकार किया जात हवै स्ही अउ गलत क्या बोध यदि पवित्र परमेश्वर कै पास से नहीं तो फे कहाँ से आवा ?

य सब कै बाद , बाइबल हमै बतावत हि कि लोग परमेश्वर के स्पष्ट तथा अस्वीकार न करै वाले ज्ञान का अस्वीकार कइ देंहै अउ एहके बावजूद एक झूठ म विश्वास करिह। रोमियों 1:25 घोषणा करत थी कि , " उ परमेश्वर की सच्चाइ का बदलके झूठ बना डारिस, अउ सृष्टि के उपासना अउ सेवा की , न कि व सृजनहार के . जो सदा धन्य है। आमीन। " बइबल य घोषणा करत थी कि परमेश्वर म विश्वास न करै कै बरे आदमिन कै पास कउनो बहाना नही आय कहेसे वहिके बिनादेखे गुन. पै वहिके सनातन सामर्थ्य , परमेश्वरत्व जगत की सृष्टि कै समय से वहिकै कामो के द्वारा देखै म आवत है , हिआ तक कि वे निरूत्तर हैं" (रोमियों 1:20)। -

लोग परमेश्वर कै अस्तित्व कै दावे का यसे अस्वीकार कइ देत है कहेसें वमा ष्वैज्ञानिकता नहींष् आऐ कहेसे यहका कउनो पुरूप नही आऐ सच्चा कारन य है कि एक बार आदमी स्वीकार कइ ल्यात ही कि परमेश्वर हवै अउ उन्ऐ परमेश्वर से माफी के जरूरत हवै (रोमियों 3:13; 6:23)। यदि परमेश्वर क्या अस्तित्व है , तो फे हम वहिके प्रति अपै कार्यों के प्रति जवाबदेह हैं। टगर परमेश्वर क्या अस्तित्व नही आऐ , तो फे हम जो चाहे वह य बात के परवाह न करत हुए कइ सकित है कि परमेश्वर हमारा निआव करी य से उ आदमीन मा बहुत से जो परमेश्वर कै अस्तित्व क्या इनकार कइ देत है प्राकृतिक विकासवाद के सिद्धान्त म शक्ति कै साथ विश्वास करत लपटे रहत ही . य उन्ऐ एक सृष्टिकर्ता परमेश्वर म विश्वास करै कै अदला मा एक विकल्प दात है प्रमेश्वर हवै अउ आखिरकार सब जानत हि कि परमेश्वर हवै ै पूर्ण तथ्य य है कि कुछ लोग वहिके अस्तित्व का असिद्ध क्या ऐत्ता उदण्डतापूर्वक प्रयास करत ही कि य स्वय मा वहिके अस्तित्व कै होए कै प्रति एक दलिल बन जात हवै।

हम कउनतना जानित ही कि परमेश्वर क्या अस्तित्व हवै|?? मसीही विश्वासी होए कै नाते , हम जानित हि कि परमेश्वर क्या अस्तित्व हवै कहेसे हम हररोज वइसे बात करित थी। हम वहिका उॅच अवाज मा हमसे बोलत नही सुनिज हॉही , परन्तु हमै वहकर उपस्थिति क्या बोध होता है , हम वहिके अगुवाइ महसूस करिज थन , हम वहिके प्रेम का जानित थी , हम वहिकै अनुग्रह क्या अभिलाषी होइत हि हमारे जीवनों में ऐसी घटनायें घटित होइ चुकी हवै जिनके व्याख्या परमेश्वर कै अतिरिक्त अउ कोउ नही देइ सकत। परमेश्वर हमै बहुत ही अधिक आश्चर्यजनक रूप से बचाइस ही अउ हमै जीवन का इनतना परिवर्तित किहिसी कि हम वहिके अस्तित्व का पहिचानऐ अउ वोहका स्तूति करै कै अतिरिक्त अउ कुछ नही कइ सकित इनमा से कउनो भी दलील अपै म कोहू का प्रेरित नही कइाकत जो य बात का पहिचानै से इनकार करत ही जो कि पहिले से इत्ती स्पष्ट हैं। अन्त मा , परमेश्वर क्या अस्तित्व विश्वास के द्वारा स्वीकार होवा चही (इब्रानियों 11:6)। अंधेरे म अंधी उड़ान नहोऐ ; परमेश्वर म विश्वास अंधेरे म अंधी उड़ान नहीं है ; य एक अच्छी.तरह से रोसन कमरा मा सुबिहित कदम है जहॉ पहिले से हि अधिकांश लोगों क्या बहुमत खड़ा हुआ है।



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