विपत्तिकाल क्या है? हम कैसे जानते है कि विपत्तिकाल सात वर्षो का होगा?



प्रश्न: विपत्तिकाल क्या है? हम कैसे जानते है कि विपत्तिकाल सात वर्षो का होगा?

उत्तर:
विपत्तिकाल भविष्य मे सात वर्षो का समय है जब परमेश्वर इस्त्राएल को पुरा अनुशासित करेगे और अविश्वासी संसार का अन्तिम न्याय करेंगे। कलिसिया, जो उन सब से बनी हुई है जिन्होने प्रभु यीशु के व्यक्तित्व और कार्य पर पाप के दण्ड से बचाए जाने के लिए विश्वास किया है, विपत्ति के समय में उपस्थित नही होगी। कलिसिया उस घटना मे जिसे विश्वासियों का उठा लिया जाना कहा जाता है, पृथ्वी पर से निकाल ली जाएगी। (थिस्सलुनीकियो 4:13-18, कुरिन्थियो 15:51-53)। कलिसिया को आने वाले क्रोध से बचा लिया जाता है (थिस्सलुनीकियो 5:9)। सारे पवित्रशास्त्र मे विपत्ति के समय के अन्य नामों से भी उल्लेख किया गया है जैसे कि प्रभु का दिन (यशायाह 2:12, 13:6-9; योएल 1:5, 2:1-31; 3:14; थिस्सलुनीकियो 5:2;) कष्ट या विपत्ति का समय (व्यावस्थविवरण 4:30;सपन्याह 1:1)। महाकलेश जो सात वर्षो के समयकाल के अधिक भयानक कलेश वाले दूसरे हिस्से को कहा जाता है (मत्ती 24:21)कष्ट का दिन या समय (दानियल 12:1; सपन्याह 1:15), याकूब के कष्ट का समय (यीर्मयाह 30:7)।

विपत्ति के समय के उदेश्य और समय को जानने के लिए दानियल 9:24-27 को समझना आवश्यक है। ये वचन 70 सप्ताह के विषय मे बताते है जिन्हे “तुम्हारे लोगो” के विरूद ठहरा दिया गया है। दानियल के लोग यहूदी है, इसराएल राष्ट्र, और दानियल 9:24 उस समयकाल की बात कर रहा है जिसमे परमेश्वर अपराधो को समाप्त कर देगा, पापो का अन्त, दुष्टता का प्रायश्चित किया जाएगा। और अनन्तकाल की धर्मीकता को प्रगट करेगा और दर्शन की बात पर और भविष्यवाणी पर मुहरबन्ध कर देगा तथा जाए, परम पवित्र का अभिषेक किया जाएगा। परमेश्वर घोषित करते है कि सत्तर सात इन सब बातो को पुरा करेगा। ये 70 सात वर्ष है, या 490 वर्ष। कुछ अनुवादक वर्षो के 70 सप्ताहों का उल्लेख करते है पुष्टि दानियल की पुस्तक के दूसरे भाग मे की जाती है। 25 और 26 वचनों में, दानियाल को बताया जाता है कि सात सात और बासठ सात (कुल 69) के बाद मसीहा को मारा जाएगा जो यरूशलेन को दुबारा बनाए जाने की आज्ञा निकलने से आरम्भ होगे। अन्य शब्दो मे यरूशलेम को दुबारा बनाए जाने की आज्ञा निकलने के 69 सात वर्ष 483 वर्ष बाद, मसीहा को मारा जाएगा। बाइबल के इतिहास कार पुष्टि करते है कि यरूशलेम को दुबारा बनाए जाने की आज्ञा निकलने से लेकर यीशु को क्रस पर चढाए जाने के समय तक 483 वर्ष हुए थे। अधिकतर मसीही विद्वान एसकोटलोजी (भविष्य की बाते/घटनाए) के विषय मे चाहे उनके विचार कुछ क्यो न हो , दानियल के विषय मे चाहे उनके विचार कुछ क्यो न हो, दानियल 70 सात की जैसे उपर बताया गया उसी प्रकार से समझते है।

जबकि यरूशलेम को दुबारा बनाए जाने की आज्ञा निकलने से लेकर मसीह को मारे जाने तक 483 वर्ष बीत चुके है, दानियल 9:24 के अनुसार ऐसे एक और सात वर्ष के समयकाल का पुरा होना शेष बचा है, जिसमे: अपराध होना बन्द हो, पापो को अनत और अधर्म का प्रायश्चित किया जाए और युग-युग की धर्मिकता प्रगट हो, दर्शन की बात पर और भविष्यवाणी पर छाप दी जाए और परम पवित्र की अभिषेक किया जाए। यह अन्तिम सात वर्ष का समयकाल विपत्ति के समय के नाम से जाना जाता है यह वह समय है जब परमेश्वर इसराएल का उसके पापो के लिए न्याय पूरा करेगा।

दानियल 9:27 सात वर्षो के विपत्तिकाल की कुछ प्रमुख बाते को प्रकाशित करता है: “वह एक सप्ताह के लिये बहुतो के संग दृढ वाचा बॉधेग। परन्तु आधे ही सप्ताह के बीतने पर वह मेल बलि और अत्रबलि घृणित वस्तुए दिखई देगी और निश्चय ठहराई गई हुई बात के समाप्त होने तक परमेश्वर क्रोध उजाडने वाले पर पडा रहेगा। यह वचन जिस व्यक्ति की बात करता है वह व्यक्ति है जिसको यीशु उजाडने वाली घृणित वस्तु कहते है 24:15 और प्रकाशित वाक्य 29-13 मे जिसे पशु कहा गया। दानियल 9:27 कहता है कि पशु सात वर्षो की वाचा बॉधेगा। परन्तु इस साप्तह के मध्य मे (3/2 वर्ष विपत्ति के समय के भीतर ) बन्द कर देगा और वाचा को तोडा डालेगा। प्रकाशित वाक्य 13 स्पष्ट करता है कि पशु अपनी एक मुरत मन्दिर मे खड़ा करेगा और संसार को उसकी उपासना करने के लिए विवश करेगा। प्रकाशितवाक्य 13:5 कहता है कि ऐसा 42 महिनो तक चलेगा, जो 3 ½ वर्ष है। जबकि दानियल 9:27 कहता है कि यह सप्ताह के मध्य मे होगा, प्रकाशितवाक्य 13:5 कहता है कि पशु ये 42 महिनो तक करेगा, यह देखना सरल है कि इस समय की कुल अवधि 84 महीने या सात वर्ष है। दानियल 7:25 भी देखे, जहॉ साढे तीन काल (3 ½ वर्ष) है जो “महाकलेश के समय”, के विषय में है, यह विपत्तिकाल का अन्तिम आधा भाग है जब पशु शासन मे होगा।

विपत्तिकाल के विषय मे अन्य उल्लेख के लिए प्रकाशितवाक्या 11:2-3 को देखे, जो 1260 दिनो और 42 महिनो, की बात करता है; दानियल 12:11-12, जो 1290 दिनो और 1335 दिनो की बात करता है। यह दिन विपत्ति के समय के मध्य बिन्दु को भी उल्लेखित करते है। दानियल 12 मे अतिरिक्त दिन सम्भवत: अन्त मे देश के न्याय के समय को (मत्री 25:31-46) और मसीहा के हजार वर्ष के राज्य के स्थापना के समय (प्राकशितवाक्य 20:4-6) को भी सम्मिलित करते है।



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