गुनाहगार की दुआ क्या है?



सवाल: गुनाहगार की दुआ क्या है?

जवाब:
गुनहगार की दुआ एक ऐसी दुआ है जिसे एक शख़्स ख़ुदा से तब करता है जब वह यह समझ जाता है कि वह गुनाहगार है और उसे एक नजात दहिन्दे की ज़रूरत है। गुनाहगार की दुआ को कहने ही से यह खुद में कुछ हासिल नहीं कर सकती है। एक सच्चे गुनाहगार की दुआ को कहने से यह खुद में कुछ हासिल नहीं कर सकती है। एक सच्चे गुनाहगार की दुआ उसके मज़हब के बारे में और अपने नजात की ज़रूरत के लिए एक शख़्स क्या जानता, समझता और ईमान लाता है, को ही सिर्फ़ पेश करती है।

गुनाहगार की दुआ का पहला पहलू यह समझना है कि हम सभी गुनाहगार हैं। रोमियों 3:10 एलान करती है कि, “कोई रास्तबाज़ नहीं, एक भी नहीं।” किताब-ए-मुक़द्दस या’नी कि बाइबल यह साफ करती है कि हम सबने गुनाह किया है हम सभी गुनाहगारों को ख़ुदा की ओर से रहमत और मु’आफ़ी की ज़रूरत है (तितुस 3:7)। अपने गुनाह के सबब, हम अबद की सज़ा के हक़्दार हैं (मत्ती 25:46)। गुनाहगार की दुआ के फैसले की जगह पर फ़ज़्ल के लिए एक गुजारिश है। यह गुस्से की जगह पर रहम का दरख़्वास्त है।

गुनहगार की दुआ का दूसरा पहलू यह जानना है कि ख़ुदा ने हमारी खोई हुई और गुनहगार के सूरत को ठीक करने के लिए क्या किया है। ख़ुदा खुद मुजस्सिम हुआ और यिसू’ मसीह इन्सान बन गये (यूहन्ना 1:1;14)। यिसू’ मसीह ने हमें ख़ुदा के बारे में सच की तालीम दी और मुकम्मल तौर से रास्तबाज़ और बेगुनाही ज़िन्दगी बिताये (यूहन्ना 8:46; 2 कुरिन्थियों 5:21)। यिसू’ तब हमारी जगह पर सलीब के ऊपर, उस सज़ा को उठाते हुए मर गये जिसके हम हक़्दार थे (रोमियों 5:8)। गुनाह, मौत और दोज़ख़ के ऊपर फ़तेह को साबित करते हुए यिसू’ मरे हुओं में से जी उठे। इन सब के सबब, हम अपने सारे गुनाहों की मु’आफी और फ़िरदौस में एक हमेशा की ज़िन्दगी को हासिल करने का वायदा हासिल कर सकते हैं- अगर हम अपना ईमान सिर्फ़ यिसू’ मसीह में रखते हैं। हमें इसके लिए सिर्फ़ यह करना है कि हम ये ईमान लाए कि वे हमारे जगह पर मर गये और मुर्दों में से जी उठे (रोमियों 10:9-10)। हम सिर्फ़ फ़ज़्ल और ईमान के जरिए, यिसू’ मसीह में ही नजात को हासिल कर सकते हैं। इफ़िसियों 2:8 एलान करती है, “क्यूँके तुम को ईमान के वसीले से फ़ज़्ल ही से नजात मिली है; और ये तुम्हारी तरफ़ से नहीं, ख़ुदा की बख़्शिश है।”

गुनाहगार की दुआ को करना ख़ुदा को यह एलान करने का एक आसान तरीका है कि आप आपके नजात के लिए यिसू’ मसीह के ऊपर मुन्हासिर हो रहे हैं। यहाँ पर ऐसे कोई “मोअज्जा” अल्फ़ाज नहीं है जिनका नतीजा नजात हैं सिर्फ़ यिसू’ की मौत और जी उठने में ईमान ही है जो हमको नजात दे सकता है। अगर आप यह समझते हैं कि आप एक गुनाहगार हैं और आपको यिसू’ मसीह के वसीले से नजात की ज़रूरत है, तो वहाँ पर एक गुनाहगार की दुआ दी गई है जिसे आप ख़ुदा से कर सकते हैं: “ऐ, ख़ुदावन्द, मैं जानता हूँ कि मैं एक गुनाहगार हूँ। मैं जानता हूँ कि मेरे गुनाहों के सज़ा पाने का लाइक़ हूँ। लेकिन फ़िर भी, मैं यिसू’ मसीह में एक नजात दहिन्दे के रूप में यक़ीन कर रहा हूँ। मैं ईमान लाता हूँ कि उनकी मौत और जी उठने ने मेरे लिए मु’आफ़ी का इन्तजाम कर दिया है। मैं यिसू’ और सिर्फ़ यिसू’ में ही उसे अपना निजी ख़ुदावन्द और नजात दहिन्दे के रूप में मानते हुए यक़ीन करता हूँ। हे ख़ुदावन्द, मेरी नजात करने और मुझे मु’आफ़ करने के लिए आपका शुक्रिया अदा करता हूँ! आमीन!”

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