क्या एक पत्नी को अपने पति के अधीन होना चाहिए?



प्रश्न: क्या एक पत्नी को अपने पति के अधीन होना चाहिए?

उत्तर:
विवाह के सम्बन्ध में अधीनता बहुत ही महत्वपूर्ण विषय है। पाप के इस संसार में प्रवेश करने से पहले, प्रभुत्व का सिद्धान्त प्रचलन में था (1 तीमुथियुस 2:13)। आदम को पहले रचा गया था, और हव्वा की रचना आदम के "सहायक" के रूप में की गई थी (उत्पत्ति 2:18-20)। ठीक उसी समय, क्योंकि वहाँ पर पाप नहीं था, मनुष्य के ऊपर परमेश्वर को छोड़ कर आज्ञापालन करने का कोई और अधिकार नहीं था। जब आदम और हव्वा ने परमेश्वर की आज्ञा उल्लंघन किया, तो पाप ने संसार में प्रवेश किया और तब अधिकार की आवश्यकता पड़ी। इसलिए, परमेश्वर ने उस अधिकार की स्थापना की जो कि भूमि के ऊपर व्यवस्था को लागू करने के लिए आवश्यक थी और साथ ही उसने हमारे लिए जरूरी सुरक्षा का प्रबन्ध किया। पहला, हमें परमेश्वर के अधीन होने की आवश्यकता थी, जो केवल एक ऐसा तरीका था जिसमें हम वास्तव में उसकी आज्ञापालन कर सकते हैं (याकूब 1:21; 4:7)। 1 कुरिन्थियों 11:2-3 में, हम पाते हैं कि पति को मसीह के अधीन होना चाहिए जैसे मसीह परमेश्वर के अधीन था। फिर यह वचन कहता है कि पत्नी को इस नमूने का अनुसरण करना चाहिए और अपने पति के अधीन होना चाहिए।

अधीनता प्रेम से भरे हुए नेतृत्वपन के लिए स्वभाविक प्रतिक्रिया है। जब एक पति उसकी पत्नी को प्रेम करता है जैसे मसीह ने कलीसिया को किया (इफिसियों 5:25-33), तब अधीनता पत्नी से पति के लिए स्वभाविक प्रतिक्रिया बन जाती है। युनानी शब्द हाईपोटासो का अनुवाद "अधीनता" में किया गया है, वह क्रिया का निरन्तर चलते रहने वाला रूप है। इसका अर्थ यह है कि परमेश्वर के, सरकार के, या एक पति के अधीन होना एक-समय का कार्य नहीं है। यह एक निरन्तर चलते रहने वाला व्यवहार है, जो कि व्यवहार की पद्धति बन जाता है। जिस अधीनता की बात इफिसियों 5 में की गई है वह एक विश्वासी का स्वार्थी, तानाशाही व्यक्ति के प्रति एक-तरफ अधीनता नहीं है। बाइबल आधारित अधीनता की रूपरेखा दो आत्मा से भरे हुए-विश्वासियों के मध्य रची गई है जो कि आपसी सहमति से एक दूसरे और परमेश्वर के प्रति झुकते हैं। अधीनता द्वि-मार्गी सड़क की तरह है। अधीनता एक सम्मान और पूर्णता की स्थिति है। जब एक पत्नी को वैसे प्रेम किया जाता है जैसे मसीह ने कलीसिया को प्रेम किया, तो अधीन होना कठिन नहीं होता है। इफिसियों 5:24 कहता है, "पर जैसे कलीसिया मसीह के अधीन है, वैसे ही पत्नियाँ भी हर बात में अपने पति के अधीन रहें।" यह वचन कह रहा है कि पत्नी को अपने पति की हर बात में अधीन रहना चाहिए जो कि उचित और व्यवस्था के अनुसार हो। इसलिए, पत्नी अधीनता के नाम पर व्यवस्था या परमेश्वर की आज्ञा उल्लंघन के लिए किसी भी तरह से मजबूर नहीं है।

मैथ्यू हेनरी ने ऐसे लिखा है कि: "स्त्री को पुरूष की पसली से बनाया गया है। उसे सिर में से नहीं बनाया गया कि वह पुरूष पर शासन करे, न कि उसे पैरों में से बनाया गया कि उसे पुरूष के द्वारा कुचला जाए, परन्तु उसकी पसली में से उसके बराबर खड़े होने, उसके हाथों के नीचे सुरक्षित, और प्रेम किए जाने के लिए उसके हृदय की निकटता में रहने के लिए बनाई गई थी।" विश्वासियों को मसीह की श्रद्धा में एक दूसरे के अधीन होना चाहिए (इफिसियों 5:21)। इफिसियों 5:19-33 के संदर्भ में सब कुछ आत्मा से भरे हुए होने के परिणाम से आता है। आत्मा से भरे-हुए-विश्वासियों को अराधना (5:19), धन्यवाद (5:20) और अधीनता (5:21) से भरे हुए होना चाहिए। पौलुस तब आत्मा-से-भरे हुए जीवन यापन के ऊपर अपने विचारों को बोलता चला जाता है और उसे वचन 22-23 में पतियों और पत्नियों के ऊपर लागू करता है। एक पत्नी को अपने पति के अधीन होना चाहिए, इसलिए नहीं क्योंकि स्त्रियाँ निम्न स्तर की हैं, परन्तु इसलिए क्योंकि इसी तरह से परमेश्वर ने वैवाहिक सम्बन्धों को कार्य करने के लिए निर्मित किया है। अधीनता का अर्थ यह नहीं हैं कि पत्नी उसके पति के लिए दरवाजे का एक "पायदान" मात्र है। इसकी अपेक्षा, पवित्र आत्मा की सहायता के साथ, एक पत्नी को अपने पति के अधीन होना चाहिए और एक पति को अपनी पत्नी को बलिदानपूर्वक प्रेम करना चाहिए।



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